बागपत , अगस्त 20 -- उत्तर प्रदेश में बागपत के रहने वाले अमन कुमार को यूनेस्को की दक्षिण एशिया रिपोर्ट में विशेष स्थान मिला है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके गांव में खुशी का माहौल है।
दरअसल, अखबार बेचने की मजबूरी से निकले जनपद के ट्यौढ़ी गांव निवासी अमन कुमार ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और देश का नाम रोशन किया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की दक्षिण एशिया क्षेत्रीय रिपोर्ट में अमन के संघर्ष और डिजिटल क्रांति मॉडल को पूरे 2 पृष्ठ दिए गए हैं।
अमन कुमार ने अपनी इस उपलब्धि को यूनीवार्ता से साझा करते हुए बताया कि कुल 70 पन्नों की इस प्रतिष्ठित रिपोर्ट में भारत, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका के बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। यूनेस्को ने उनके उस मिशन की सराहना की है जिसके जरिए वे पिछले कई सालों से गांव-देहात तक तकनीक और सही जानकारी पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गांव गांव पढ़ाई के साथ सुबह अखबार बांटते समय महसूस किया कि गांव में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही जानकारी न मिलने से होनहार बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हो जाते हैं। अमन का मानना है कि इस डिजिटल युग में सूचना न मिलना ही सबसे बड़ी गरीबी है। इसी हकीकत ने उन्हें बदलाव के लिए प्रेरित किया और उन्होंने ठान लिया कि अब कोई युवा जानकारी के अभाव में पीछे नहीं छूटेगा।
इसी सोच के साथ अमन ने कॉन्टेस्ट 360 डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य गांव के आखिरी कोने तक छात्रवृत्तियों, प्रतियोगिताओं और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी पहुंचाना है। आज इस पहल से 8.6 मिलियन से अधिक युवा जुड़कर अपने सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं।
माय भारत स्वयंसेवक के रूप में अमन ने जिलाधिकारी आईएएस अस्मिता लाल और सूचना विभाग के सहयोग से जिले के लिए तकनीकी समाधान भी विकसित किए। उनके द्वारा बनाया गया कांवड़ यात्रा ऐप, स्वीप बागपत ऐप और सूचना सेतु ऐप ई-गवर्नेंस को नई दिशा दे रहे हैं। इनका मकसद यही है कि कोई नागरिक केवल जानकारी न होने की वजह से अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और यूनेस्को द्वारा आयोजित इंडिया एआई रेडिनेस सम्मेलन में देशभर के टेक एक्सपर्ट्स और नीति-निर्माताओं के बीच बागपत के इस युवा ने गांव की जमीनी हकीकत रखी।
अमन ने कहा, "जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य तय कर रहे हैं तो उसमें गांव की महिलाओं, किसानों और देहात के युवाओं की भागीदारी सबसे पहले होनी चाहिए, जिन पर इस तकनीक का सबसे अधिक असर पड़ेगा।" यूनेस्को ने गांव-देहात को साथ लेकर चलने की अमन की इसी क्रांतिकारी सोच को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।
बागपत के छोटे से गांव से निकलकर यूनेस्को के वैश्विक मंच तक पहुंचे अमन कुमार का यह सफर साबित करता है कि मजबूत संकल्प हो तो गांव का एक आम युवा भी दुनिया की सबसे बड़ी संस्था में अपनी आवाज दर्ज करा सकता है।
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