बागपत , नवंबर 16 -- उत्तर प्रदेश में बागपत के खेकड़ा कस्बे में जन्मी वीरांगना बेटी एवं आजाद हिंद फौज की वीर सेनानी नीरा आर्य की गाथा को अंडमान-निकोबार प्रशासन ने ऐतिहासिक सम्मान दिया है। उनकी आत्मकथा 'मेरा जीवन संघर्ष' को अब वहां के सभी स्कूल पुस्तकालयों में शामिल किया गया है, ताकि छात्र-छात्राएं देश के लिए बलिदान देने वाली इस वीरांगना के संघर्षपूर्ण इतिहास से परिचित हो सकें।

इतिहासकारों की माने तो महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नीरा आर्य ने काला पानी जेल में अमानवीय यातनाएं झेलने के बावजूद देश के प्रति अपना संघर्ष जारी रखा था। अब उनकी ही जन्मभूमि खेकड़ा के लिए गौरव का क्षण है कि अंडमान-निकोबार के छात्र उनकी जीवनी से प्रेरणा लेंगे।

अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के शिक्षा निदेशालय ने उनकी आत्मकथा को छात्रों और स्थानीय लोगों तक उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। खेकड़ा कस्बा स्थित नीरा आर्य स्मारक पुस्तकालय के संस्थापक व प्रसिद्ध साहित्यकार तेजपाल आर्य ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने पुस्तक की खरीद के लिए प्रकाशकों को आदेश जारी कर दिए हैं। दिल्ली स्थित डीके पब्लिकेशन को भी आत्मकथा की आपूर्ति का ऑर्डर मिला है।

तेजपाल आर्य का कहना है कि अंततः काला पानी प्रशासन ने नीरा आर्य के अप्रीतम बलिदान और योगदान को स्वीकारते हुए उनकी आत्मकथा को प्रेरणादायक ग्रंथ माना है। यही कारण है कि इसे अब द्वीप समूह के स्कूलों और पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जा रहा है। उनका मानना है कि बलिदानी नीरा आर्य की आत्मकथा, अंडमान-निकोबार के छात्रों में देशभक्ति, साहस और संघर्ष की भावना जाग्रत करने में एक नया अध्याय साबित होगी।

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