बागपत , जुलाई 14 -- उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ागांव स्थित विश्व प्रसिद्ध त्रिलोक तीर्थ धाम को उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।
मंगलवार को मंदिर प्रबंधन के नेतृत्व में जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ स्थित पर्यटन भवन पहुंचकर पर्यटन विभाग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की और बड़ागांव को शीघ्र पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग उठाई। अधिकारियों ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में आचार्य सन्मति सागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित विश्वविख्यात त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और आध्यात्मिक भव्यता के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
मंदिर बनने के बाद से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ा है। जैन समाज और क्षेत्रवासियों के लंबे प्रयासों का ही परिणाम रहा कि एनएचएआई ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर बड़ागांव के लिए चढ़ने-उतरने का मार्ग भी स्वीकृत किया, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही और अधिक सुगम हो गई।
मंगलवार को त्रिलोक तीर्थ धाम मंदिर के प्रबंधक त्रिलोक चंद जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन विभाग के महानिदेशक वेदपति मिश्र, प्रबंध निदेशक आशीष कुमार तथा मुख्य प्रबंधक (पर्यटन) से विस्तृत वार्ता की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को त्रिलोक तीर्थ मंदिर का आकर्षक मॉडल भी भेंट किया और क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं से अवगत कराया।
इस दौरान अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि बड़ागांव को पर्यटन स्थल घोषित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई को शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। त्रिलोक चंद जैन ने कहा, यदि बड़ागांव को आधिकारिक रूप से पर्यटन स्थल का दर्जा मिलता है, तो इससे न केवल जैन समाज की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी, बल्कि खेकड़ा, रटौल, लोनी, चांदीनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन, रोजगार और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी। इस आश्वासन से पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है।
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