बांदा , जनवरी 15 -- उत्तर प्रदेश के बांदा में मकर संक्रांति के पर्व पर विभिन्न मान्यताओं पर आधारित दो दिवसीय ' आशिकों का मेला' गुरुवार को संपन्न हो गया।
बुधवार और गुरुवार को संपन्न इस मेले में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के निकटवर्ती जिलों के हजारों नागरिकों ने भाग लिया।बड़ी संख्या में पहुंचे प्रेमी प्रेमिकाओं ने नटबली मंदिर में माथा टेक कर पूजा, आरती, अर्चना कर मन्नत मांगी। प्राचीन मान्यता के अनुसार नट बली मंदिर में प्रेमी प्रेमिकाओं द्वारा मांगी गई सभी मन्नत पूरी हो जाती है।
मान्यता के अनुसार भूरागढ़ दुर्ग में यह आयोजित मेला प्रेम कथा पर आधारित है। सन 1857 के पूर्व भूरागढ़ किले के राजा अर्जुन सिंह की पुत्री का प्रेम गरीब वीरन नामक एक नट से हो गया था। दोनों शादी के लिए अडिग थे लेकिन किलेदार राजा अर्जुन सिंह ने शादी के लिए एक चालाकी भरी शर्त रखी कि यदि नट वीरन एक रस्सी में चलकर नदी पार कर लेगा, तभी वह अपनी पुत्री की शादी उसके साथ करने के लिए राजी होगा। गरीब नट वीरन ने राजा की शर्त कबूल की। राज दरबार द्वारा नदी के दोनों छोरों को मिलाकर एक पतली रस्सी बांधी गई। जिस पर चलकर नट ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और रस्सी में चलकर नदी पार कर वह रस्सी के अंतिम छोर तक पहुंच ही रहा था। तभी रस्सी काट दी गई। जिससे वह नदी किनारे पत्थरों में गिरा और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
जानकारी पर उसकी प्रेमिका किलेदार राजा की पुत्री ने भी किले से कूद कर आत्महत्या कर ली। जिसके बाद इस स्थान पर एक नटबली मंदिर की स्थापना की गई और प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर्व पर आशिकों का मेले के आयोजन की शुरुआत हुई। दूसरी ओर इतिहासकारों ने इस मान्यता को खारिज करते हुए बताया कि वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के कई जिलों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हज़ारों की संख्या में बांदा पहुंचे थे और उनका अंग्रेजों से भीषण युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान भूरागढ़ दुर्ग में 3,300 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भूरागढ़ दुर्ग में फांसी दी गई थी। जिसमें नट जाति के सर्वाधिक लगभग 800 देशभक्त शामिल थे। इस युद्ध में शहीद नट जाति की संख्या अधिक होने से लोगों ने शहीदों की याद में नटबली मंदिर की स्थापना की और तभी से शहीदों की याद में विशाल ऐतिहासिक मेले का आयोजन शुरू हुआ।
इस आयोजित द्विदिवसीय मेले में केन नदी के तट पर स्थापित विभिन्न घाटों में आज बड़ी संख्या में नागरिकों ने डुबकी लगाई और भगवान सूर्य देव को जल अर्पित कर पूजा आरती की। नदी किनारे घूम घूम कर पथरीले इलाकों लुफ्त उठाया गया। पिकनिक कर सेल्फी ली। भूरागढ़ गांव में एक विशाल दंगल का आयोजन भी किया गया।
इस अवसर पर जहां नटबली मंदिर में पूजा अर्चना और मन्नत का सिलसिला जारी रहा वहीं शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
चारों ओर सजी सजाई दुकानों में खरीददारी की गई। लोगों ने नौका विहार का लुफ्त उठाया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित