हमीरपुर , दिसम्बर 15 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में संपन्न हुई पशुगणना में दस साल बाद करीब एक लाख पशुओं की कमी सामने आयी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फसल में जरुरत से ज्यादा उर्वरक डालने से दुधारु पशुओ में लगातार बांझपन बढता जा रहा है यदि यही हालात रहे तो दुधारु पशुओ में आने वाली कमी से लोग एक एक बूंद दूध को तरसेंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी(सीवीओ) डा शालिग राम ने सोमवार को बताया कि शासन हर दस साल बाद पशु गणना कराना सुनिश्चित किया है पिछली गणना में दो लाख पचासी हजार छोटे बडे पशुओ की गणना की गयी थी दस साल बाद जब गणना की गयी थी तो करीब एक लाख पशुओं की कमी आयी है। जिसमे सबसे ज्यादा गौवंशों में कमी आयी है।

डा राम ने बताया कि अधिक उर्वरक डालने से जो पशु चारा व दाना खाते है उनमे बांझपन के हालात उत्पन्न होते जा रहे है जिले में करीब 40 फीसदी दुधारु पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है यह केवल तीस फीसदी ही सफल है, इसलिये दुधारु पशुओं की संख्या लगातार गिरती जा रही है हालांकि लगातार गिरते पशुधन मे सरकार ने चिंता जाहिर की है इसके लिये किसानोें को लगातार जागरुक किया जा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित