नयी दिल्ली , अक्टूबर 07 -- रेलवे ने अपने परमानेंट वे (पी-वे) कार्यबल के पुनर्गठन की घोषणा की है। इसके तहत मौजूदा कारीगर संवर्ग को एक नये बहु-कौशल ट्रैक तकनीशियन (एमएसटीटी) संवर्ग में शामिल किया जाएगा। इस नयी चार-स्तरीय व्यवस्था में भर्ती, पदोन्नति और विशेष प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है।
गौरतलब है कि पी-वे मतलब रेलवे ट्रैक की पूरी स्थायी संरचना से होता है, जिस पर ट्रेनें चलती हैं। इसमें रेल की पटरियां, स्लीपर , फास्टनिंग्स यानी क्लिप, फिश प्लेट और बोल्ट और गिट्टी (पत्थर के टुकड़े) शामिल होते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों को इस व्यवस्था को को लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत परमानेंट वे (पी-वे) कारीगर कार्यबल को वेतन स्तर दो से छह तक तकनीशियन (ट्रैक) के विभिन्न श्रेणी में पुनर्गठित किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि यह फैसला गत 27 फरवरी को गठित समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है, जिसने मौजूदा पी-वे कारीगर संवर्गों के विलय की समीक्षा की थी। रेलवे बोर्ड ने अंतिम रूप देने से पहले ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (एआईआरएफ) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) से भी परामर्श किया। सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने इसकी मंजूरी प्रदान कर दी है।
सूत्रों ने बताया कि पहले चरण में मौजूदा पी-वे कारीगर संवर्ग और उसके कर्मचारियों को एमएसटीटी संवर्ग में विलय किया जाएगा। नयी व्यवस्था में वेतन स्तर दो पर तकनीशियन (ट्रैक) श्रेणी-तीन, स्तर चार पर श्रेणी -दो, स्तर पांच पर ग्रेड-एक और स्तर छह पर वरिष्ठ तकनीशियन (ट्रैक) का पद होगा। विलय किए गये संवर्ग में कर्मचारियों की वरिष्ठता और ग्रेडिंग भारतीय रेलवे स्थापना नियमावली के अनुसार निर्धारित की जाएगी।
नयी व्यवस्था में श्रेणी-तीन के 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता और उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसके लिए व्यवसायिक परीक्षा के माध्यम से कर्मचारियों की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। शेष 25 प्रतिशत पद पात्र फीडर श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) के माध्यम से भरे जाएंगे।
इंजीनियरिंग विभाग के ट्रैक अनुरक्षक-चार, ट्रैक अनुरक्षक-तीन और पात्र स्तर-एक सहायक कर्मचारियों को निर्धारित सेवा अवधि और शैक्षणिक योग्यता पूरी करने की शर्त पर फीडर श्रेणियों में शामिल किया जाएगा।
वेतन स्तर चार पर तकनीशियन (ट्रैक) श्रेणी-दो के सभी पद श्रेणी तीन से वरिष्ठता और उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति से भरे जाएंगे। इसके लिए व्यवसायिक परीक्षा पास करना और कम से कम दो वर्ष की नियमित सेवा पूरी करना जरूरी होगा।
वेतन स्तर पांच पर श्रेणी-एक और स्तर छह पर वरिष्ठ तकनीशियन के पद पिछले श्रेणी से पदोन्नति के माध्यम से भरे जाएंगे। इसके लिए कम से कम दो वर्ष की नियमित सेवा और निर्धारित मानदंडों के तहत मूल्यांकन की शर्त होगी।
वेतन स्तर छह के वरिष्ठ तकनीशियन आवश्यक शैक्षणिक और सेवा संबंधी योग्यताएं पूरी करने पर विभागीय पदोन्नति और सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) दोनों कोटे के तहत जूनियर इंजीनियर (पी-वे) के पद पर पदोन्नति के पात्र होंगे।
सूत्रों ने बताया कि तकनीशियन (ट्रैक) के पदों पर सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवारों के पास मैट्रिकुलेशन/एसएसएलसी के साथ राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) या राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त संस्थान से निर्धारित तकनीकी ट्रेड में आईटीआई की योग्यता होना जरूरी होगा। पात्र ट्रेडों में वेल्डर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मेकाट्रॉनिक्स, डीजल मैकेनिक, मोटर वाहन मैकेनिक, मशीनिस्ट, मशीनिस्ट-ग्राइंडर और अन्य निर्धारित ट्रेड शामिल हैं। निर्धारित ट्रेड में एक्ट अप्रेंटिसशिप पूरी कर चुके मैट्रिकुलेशन/एसएसएलसी उत्तीर्ण उम्मीदवार भी पात्र होंगे।
द्वितीय चरण के तहत रेलवे बोर्ड ने बहु-कौशल तकनीशियन (ट्रैक) संवर्ग की कुल संख्या को स्वीकृत ट्रैक मेंटेनर संवर्ग की संख्या के 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति दी है। यह प्रतिशत यातायात घनत्व, काम करने की परिस्थितियों और कार्य संबंधी जरूरतों के आधार पर अलग-अलग मंडलों में अलग हो सकता है। इसका निर्धारण संबंधित क्षेत्रीय रेलवे द्वारा किया जाएगा। हालांकि, आदेश में मौजूदा ट्रैक अनुरक्षक के तत्काल पदोन्नति के अवसर को सुरक्षित रखा गया है।
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