अमृतसर , जुलाई 16 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने बहिबल कलां गोलीकांड मामले में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को एसआईटी द्वारा 20 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब किये जाने के संदर्भ में कहा कि भाजपा शुरू से ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के दायरे में जांच की पक्षधर रही है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में 'दूध का दूध और पानी का पानी' होना चाहिए।

प्रो. ख्याला ने गुरुवार को कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा राजनीतिक नेता, अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, यदि उसने कानून का उल्लंघन किया है या गलत आदेश दिये हैं तो उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। किसी भी निर्दोष व्यक्ति को राजनीतिक या अन्य कारणों से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी बेगुनाहों की सुरक्षा भी है।

उन्होंने कहा कि एसआईटी इस मामले में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला से भी पूछताछ कर चुकी है। सांपला ने एसआईटी से उस ज्ञापन की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, जो उन्होंने उस समय अकाली दल के नेताओं के साथ तत्कालीन राज्यपाल को सौंपा था, ताकि वह अपने हस्ताक्षरों की पुष्टि कर सकें। ख्याला ने सवाल उठाया कि यदि यह दस्तावेज जांच के लिए महत्वपूर्ण है तो उसकी प्रति उपलब्ध क्यों नहीं करायी गयी।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बहिबल कलां गोलीकांड से भाजपा का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था, हालांकि उस समय वह सरकार में सहयोगी दल थी। उन्होंने कहा कि गोली चलाने का निर्णय कैबिनेट में नहीं लिया गया था। उस समय गृह विभाग तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के पास था और कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के अधीन थी। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक मंतर सिंह बराड़ और तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी गगनदीप सिंह बराड़ के बयानों का भी निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की अनुमति किस स्तर पर और किसके आदेश पर दी गयी थी।

प्रो. ख्याला ने कहा कि 14 अक्टूबर 2015 को कोटकपूरा और बहिबल कलां में हुई घटना को लगभग 10 वर्ष हो चुके हैं, जिसमें भाई कृष्ण भगवान सिंह और भाई गुरजीत सिंह सरावां की मौत हुई थी। इतने लंबे समय के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट और चालान में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसएसपी चरणजीत शर्मा सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

उन्होंने यह भी मांग की कि मामला फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित होने के बाद यह सुनिश्चित किया जाये कि पीड़ित परिवारों और गवाहों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो।

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