जगदलपुर , जून 18 -- छत्तीसगढ के बस्तर संभाग में आगामी वर्षाकाल के दौरान संभावित बाढ़ आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभाग के सभी सात जिलों में जिला एवं तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किये हैं तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयुक्त बस्तर के निर्देश पर उपायुक्त गीता रायस्त ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय तथा तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है तथा रोस्टर के आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर सतत निगरानी और आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित सूचना एवं राहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के संपर्क नंबर संकलित किए गए हैं। उनसे किसी भी जलभराव अथवा बाढ़ की स्थिति की तत्काल सूचना नियंत्रण कक्ष को देने की अपील की गई है।

संभाग के सभी जिलों में संभावित बाढ़ प्रभावितों के लिए अस्थायी राहत शिविरों का चिन्हांकन कर लिया गया है। इन शिविरों में खाद्यान्न, पेयजल, चिकित्सा दल, जीवन रक्षक दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मोटरबोट, नाव, प्रशिक्षित गोताखोर और लाइफ जैकेट जैसे संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। वहीं पहुंचविहीन गांवों में अगले चार माह के लिए खाद्यान्न एवं आवश्यक सामग्रियों का भंडारण किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों तथा मितानिनों के पास भी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

बैठक में सभी जिलों में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्षों की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार कर आम नागरिकों को जागरूक करने के निर्देश भी दिये गये।

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