जगदलपुर , जुलाई 24 -- छत्तीसगढ के बस्तर में 'एक पेड़ माँ के नाम 3.0' राष्ट्रीय अभियान के तहत आयोजित जिला स्तरीय वन महोत्सव-2026 में शुक्रवार को 630 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया तथा वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को 36 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि एवं डमी चेक वितरित किए गए।
वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'एक पेड़ माँ के नाम' केवल अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और माँ के प्रति हमारा पवित्र कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव है। उन्होंने लोगों से रोपे गए पौधों का संरक्षण परिवार के सदस्य की तरह करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने बस्तर के जंगलों और जनजातीय संस्कृति को क्षेत्र की पहचान बताते हुए युवाओं से पर्यावरण संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए पौधरोपण और पौधों का संरक्षण समय की आवश्यकता है।
इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर के लगभग डेढ़ एकड़ क्षेत्र में 630 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान 'ग्रीन कैनवास' सह-हस्ताक्षर अभियान भी आयोजित किया गया। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ने लगाये गये सभी पौधों की देखभाल और सिंचाई का दायित्व लेने की घोषणा की, जिसकी मंत्री ने सराहना की।
वन विभाग की योजनाओं के तहत तेंदूपत्ता संग्राहक कल्याण योजना के पांच हितग्राहियों को एक लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि, पांच मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख 15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति तथा मलिक मकबूजा मद के अंतर्गत चार हितग्राहियों को 30 लाख 45 हजार रुपये का लाभांश प्रदान किया गया। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत तीन कृषकों को 21 हजार रुपये तथा मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व राहत मद के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को कुल तीन लाख 25 हजार रुपये की सहायता राशि भी वितरित की गई।
कार्यक्रम में चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पांडेय, एवरेस्ट विजेता नैना सिंह धाकड़, 'ट्री मैन' संपत झा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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