जगदलपुर , अक्टूबर 08 -- अविभाजित मध्यप्रदेश में प्रशासनिक सेवाएं दे चुके 11 सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों ने छत्तीसगढ के बस्तर संभाग का भ्रमण कर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में आए बदलावों की सराहना की है। पूर्व आईएएस अधिकारियों ने कहा कि बस्तर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है और आने वाले समय में देश के अग्रणी संभागों में अपनी पहचान स्थापित करने की क्षमता रखता है।
बस्तर प्रवास पर पहुंचे सेवानिवृत्त अधिकारियों में बीएल कुरिल, रेणु तिवारी, मनोहर दुबे, सुरेन्द्र उपाध्याय, एसएन रूपला, भरत अग्रवाल, टीसी महावर, डीडी सिंह, जयश्री कियावत, सुनीता त्रिपाठी और उल्हास तेलंग शामिल रहे।
अधिकारियों ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय जनजीवन को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा, समृद्ध लोक परंपराएं और विशिष्ट संस्कृति बस्तर को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय लोगों की सरलता, मेहनत और अपनी परंपराओं के प्रति जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोग हैं, जिनकी भागीदारी क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद उन्होंने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर शहीद जवानों को पुष्पांजलि अर्पित की। अधिकारियों ने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा स्थापित करने में सुरक्षा बलों के जवानों के योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
इस दौरान अधिकारियों ने जगदलपुर के पण्डुम कैफे में पुनर्वासित युवाओं से मुलाकात कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में युवाओं के प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें परिवार और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
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