रायपुर , अगस्त 01 -- छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात को लेकर दिए गए बयान पर आज पलटवार करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति और सम्मान से जुड़े विषयों पर कांग्रेस की टिप्पणी जनजातीय समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।
श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम किसी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजातीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से बस्तर के लोक कलाकारों, पारंपरिक व्यवस्थाओं और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू से हुई भेंट पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलना बस्तर की संस्कृति की स्वीकार्यता को दर्शाता है। ऐसे अवसर पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
वन मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आदिवासी समाज को सम्मान और पहचान मिल रही है तो कांग्रेस को परेशानी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि अपने लंबे शासनकाल में उसने बस्तर की संस्कृति, लोक कलाकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए क्या प्रयास किए।
श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर अब शांति, विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय तक बस्तर को नक्सली हिंसा और पिछड़ेपन की छवि से जोड़ती रही।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों के सम्मान पर सवाल उठाना केवल सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि उन कलाकारों और पूरे जनजातीय समाज के स्वाभिमान का अपमान है। उन्होंने कहा कि बस्तर अपनी संस्कृति और विकास के साथ आगे बढ़ रहा है और जनता इस बदलाव को देख रही है।
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