जगदलपुर , अक्टूबर 12 -- छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में पारंपरिक भूमिका निभाने वाले 30 मुंडा बाजा वादकों को छह वर्षों से मानदेय नहीं मिलने का मामला सामने आया है। वादकों ने लंबित मानदेय को लेकर नाराजगी जताते हुए दशहरा उत्सव में शामिल नहीं होने का आज निर्णय लिया है। इस मुद्दे पर बस्तर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है।
मौर्य ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि बस्तर दशहरा आदिवासी संस्कृति, आस्था और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है, लेकिन इस परंपरा को पीढ़ियों से जीवित रखने वाले कलाकारों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में मुंडा बाजा वादकों को मानदेय देने की घोषणा किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन वादकों के अनुसार छह वर्ष बीतने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है।
उन्होंने बताया कि वादकों ने करीब एक महीने पहले बस्तर राजपरिवार के सदस्य, दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप, जिला कलेक्टर और तहसीलदार को आवेदन देकर अपनी मांग से अवगत कराया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
मौर्य के अनुसार, मामले को लेकर अनुविभागीय दंडाधिकारी और राजस्व निरीक्षक ने वादकों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वादक अब मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं।
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