जगदलपुर , मई 19 -- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर के विकास, नक्सल उन्मूलन और आदिवासी सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए मंगलवार को यहां कहा कि आने वाले पांच वर्षों में इस क्षेत्र को विकास और समृद्धि के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाएगा।
श्री शाह ने दो दिन के बस्तर प्रवास के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार ने बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए तीन स्तंभों पर आधारित कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलना, युवाओं और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित एवं सशक्त बनाने के लिए वैज्ञानिक कार्यक्रम लागू करना तथा जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू किए गए "बस्तर पंडूम" ने स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य किया है। इस आयोजन में स्थानीय भाषा, व्यंजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को मंच दिया गया। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 45 हजार लोगों ने भाग लिया था, जबकि बाद में प्रतिभागियों की संख्या बढ़कर तीन लाख 94 हजार तक पहुंच गयी।
गृह मंत्री ने कहा कि गांव स्तर से शुरू होकर तहसील, जिला और संभाग स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोग अपनी संस्कृति के संरक्षण से जुड़े। उन्होंने बताया कि अब तक दो बार "बस्तर ओलंपिक" आयोजित किए जा चुके हैं और हालिया आयोजन में तीन लाख 94 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वासित नक्सली परिवारों और पूर्व नक्सल प्रभावित युवाओं ने भी इसमें उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए "सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्ति" का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर का हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ जाता, तब तक नक्सलवाद की समाप्ति अधूरी मानी जाएगी।
उन्होंने माओवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को संदेश देते हुए कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। लोकतांत्रिक मूल्यों, सहयोग और विकास की अवधारणा ही समाज और व्यक्ति को आगे बढ़ा सकती है।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण दशकों तक बस्तर विकास से वंचित रहा। स्कूल इसलिए नहीं बन पाए क्योंकि उन्हें उड़ाया गया, अस्पतालों का संचालन प्रभावित हुआ और बैंकिंग व्यवस्था बाधित रही।
उन्होंने एक बड़ी घोषणा की कि बस्तर में सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अब "वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा" में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सेवा डेरों के माध्यम से सरकार गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचेगी। यहां बैंकिंग सुविधा, आधार कार्ड निर्माण, डिजिटल सेवाएं, कॉमन सर्विस सेंटर, सस्ती राशन दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
श्री शाह ने बताया कि कॉमन सर्विस सेंटरों के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास की कार्ययोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार सृजन, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सेवा डेरों के माध्यम से ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा तथा बैंकिंग, डिजिटल सेवाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर देश के अन्य हिस्सों की तुलना में विकास की दौड़ में 30 से 40 वर्ष पीछे रह गया है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार यहां आधारभूत संरचना, सिंचाई परियोजनाएं, रेलवे कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले पांच वर्षों में बस्तर के नागरिकों की औसत आय छह गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
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