रायपुर , जून 15 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।

श्री साय ने रायपुर में रविवार रात पुस्तक 'तेरा राज नहीं आएगा रे' के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आमजन तक मूलभूत सुविधाएं और शासकीय सेवाएं सहज रूप से पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी है। सुरक्षा बलों, आम जनता, पत्रकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों के सामूहिक प्रयासों से माओवाद के विरुद्ध जनमत मजबूत हुआ और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखकों राजीव रंजन प्रसाद और रचना नायडू की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति माओवाद के दौर, उसके दुष्प्रभावों और उससे मुक्ति के संघर्ष का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में व्यापक शोध के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार माओवादी संगठन ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाया तथा एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा और सामान्य जीवन से दूर कर दिया।

श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार 'बस्तर रोडमैप 2.0' के तहत क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। सुरक्षा शिविरों वाले क्षेत्रों में अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं, जो कौशल विकास, उद्यमिता और जनसेवा के केंद्र बनेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से अगले तीन वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। सहकारिता, पशुपालन, कृषि और लघु वनोपज आधारित गतिविधियों के माध्यम से आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है तथा अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज निर्माण से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा।

उन्होंने कहा कि बस्तर में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नयी पहचान दिलायी है।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा कि यह पुस्तक वर्षों की मेहनत, अध्ययन और जमीनी शोध का परिणाम है। वहीं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद एक विचारधारा के रूप में आया था, जिसका उद्देश्य हिंसा के माध्यम से सत्ता स्थापित करना था, लेकिन अब बस्तर में सामान्य जीवन लौट रहा है और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में फिर से रौनक दिखाई दे रही है।

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