बर्लिन , फरवरी 22 -- प्रशंसित फिल्म निर्माता रीमा दास ने अपनी फिल्म 'नॉट ए हीरो' के लिए 'बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026' में 'क्रिस्टल बियर स्पेशल मेंशन' पुरस्कार जीता है।
पुरस्कार समारोह शनिवार को आयोजित किया गया था। इसमें जूरी ने फिल्म को विशेष सम्मान से नवाजा है। असमिया, हिंदी और अंग्रेजी में बनी इस फिल्म को पिछले सप्ताह प्रतियोगिता के 'जेनरेशन के प्लस' खंड में प्रदर्शित किया गया था।
चिल्ड्रन जूरी 'जेनरेशन के प्लस' के सदस्यों में वाल्टर मोरित्ज अरंड्स, गुस्ताव अर्न्ज, थाबानी डाबुलमान्जी, रोजा सोफी क्रास्जनाहोरकाई, वेरा मार्श, एमिर एफे ओजेरन और अल्मा सोफिया विलानेवा बुलेमर शामिल थे।
रीमा दास की यह फिल्म एक छोटे लड़के की कहानी है, जो शहर से अपने पैतृक गांव आता है। वहां के वातावरण में अपनी ताकत और साहस की नयी परिभाषा ढूंढ़ता है।
बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में रीमा दास की यह लगातार तीसरी फिल्म थी, जो उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
इस बार यह फिल्म फेस्टिवल न सिर्फ भारतीय फिल्मकार रीमादास की फिल्म को पुरस्कार मिलने की वजह से चर्चा में है, बल्कि भारत की मानवाधिकार कार्यकर्ता और मशहूर लेखिका अरुंधति राय समेत कई कलाकार-फिल्मकारों के समारोह का बहिष्कार करने की वजह से भी चर्चा में है।
समारोह को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब जूरी अध्यक्ष और दिग्गज फिल्मकार विम वेंडर्स ने महोत्सव की शुरुआत में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फिल्मकारों को 'राजनीति से दूर रहना चाहिए'। जब उनसे गाजा संघर्ष और उसमें जर्मनी की भूमिका पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिल्में दुनिया बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक तरीके से नहीं।
भारत की मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय ने विम वेंडर्स के इस बयान के विरोध में समारोह से अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने विम वेंडर्स की टिप्पणी को हैरान करने वाला बताया। श्रीमती रॉय ने कहा कि जब मानवता के खिलाफ अपराध हो रहे हों, तब यह कहना कि कला को राजनीतिक नहीं होना चाहिए, यह बातचीत बंद करने का तरीका है।
उन्हें अपनी 1989 की फिल्म 'इन ह्विच एनी गिव्स इट दोज वंस' की स्क्रीनिंग के लिए वहां जाना था।
समारोह का बहिष्कार करने वालों में श्रीमती रॉय के अलावा प्रमुख लोगों में फिलिस्तीनी फिल्मकार अकीम कवासमी और ईरानी-जर्मन कलाकार मैरी लोहानी भी शामिल हैं। इन्होंने समारोह के चुनिंदा मानवाधिकार स्टैंड के विरोध में अपनी भागीदारी वापस ले ली।
समारोह पर आरोप लगा कि वह 'चुनिंदा मानवाधिकार' का पालन कर रहा है। आलोचकों और कई फिल्मकारों ने खुला पत्र लिखकर कहा कि समारोह यूक्रेन और ईरान के मुद्दों पर तो मुखर है, लेकिन गाजा में हो रही मौतों पर चुप है।
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