बर्लिन , फरवरी 22 -- 76वें बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 का सबसे बड़ा सम्मान 'गोल्डन बियर' जर्मन निर्देशक इल्कर चातक की फिल्म 'येलो लेटर्स' को दिया गया है।
सिल्वर बियर ग्रैंड ज्यूरी प्राइज एमिन अल्पर की फिल्म 'साल्वेशन' को दिया गया। तीसरा प्रमुख ज्यूरी पुरस्कार अमेरिकी निर्देशक लांस हैमर की फिल्म 'क्वीन एट सी' के हिस्से में आया।
महोत्सव की शुरुआत शहरबानू सादात की जर्मन-अफगान ड्रामा फिल्म नो गुड मेन के साथ हुई। उद्घाटन समारोह के दौरान मलेशियाई अभिनेत्री मिशेल योह को 'ऑनरेरी गोल्डन बियर' से सम्मानित किया गया।
इल्कर चतक की 'येलो लेटर्स' फिल्म तुर्की की पृष्ठभूमि पर आधारित एक मार्मिक ड्रामा है, जो वहां के रंगमंच जगत के दो कलाकारों की कहानी है। राजनीतिक कारणों से अपनी नौकरी खोने के बाद उनके वैवाहिक जीवन में आये तनाव और देश में बढ़ते अधिनायकवाद के खतरों को यह फिल्म बेहद संजीदगी से दर्शाती है।
दूसरे स्थान पर रहने वाली एमिन अल्पर निर्देशित फिल्म 'साल्वेशन' भी तुर्की पृष्ठभूमि पर ही है। इसमें पहाड़ी इलाकों में दशकों से चले आ रहे भूमि विवाद और उसके सामाजिक प्रभावों की पड़ताल की गयी है।
फिल्म 'क्वीन एट सी' लंदन में रहने वाली एक प्रोफेसर और डिमेंशिया से जूझ रही उसकी मां के बीच के जटिल और भावुक रिश्तों को पर्दे पर उतारती है, जिसमें मुख्य भूमिका प्रसिद्ध फ्रांसिसी अभिनेत्री जूलियट बिनोश ने निभायी है।
इसके अतिरिक्त अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण सम्मान दिये गये। इसमें ब्रिटिश फिल्म निर्माता ग्रांट गी को जैज पियानोवादक बिल इवांस के जीवन पर आधारित फिल्म 'एवरीबॉडी डिग्स बिल इवांस' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का 'सिल्वर बियर' मिला।
अभिनय के लिए 'रोज' फिल्म की मुख्य अभिनेत्री सैंड्रा हुलर को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार दिया गया। इन्होंने 17वीं शताब्दी की एक ऐसी महिला का किरदार निभाया, जो पुरुष वेश में पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देती है।
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनय का पुरस्कार 'क्वीन एट सी' के कलाकारों अन्ना काल्डर-मार्शल और टॉम कर्टने को संयुक्त रूप से दिया गया, जिन्होंने बुजुर्ग दंपती के मानसिक और शारीरिक संघर्षों को बेहद बारीकी से निभाया है।
तकनीकी और रचनात्मक श्रेणियों में कनाडाई फिल्म निर्माता जेनेवीव दुलुद-डी सेलेस को उनकी फिल्म 'नीना रोजा' के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा का सम्मान मिला, जो सांस्कृतिक पहचान बचाने के संघर्ष की कहानी है।
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