बागपत , मार्च 17 -- कभी जीवनदायिनी रही हिंडन नदी को बचाने की मुहिम अब गांव-गांव तक पहुंचती नजर आ रही है। इसी क्रम में मंगलवार को हिंडन नदी शोध यात्रा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के महाभारतकालीन गांव बारनावा पहुंची। यात्रा के दौरान नदी किनारे आयोजित नदी सभा और श्रमदान कार्यक्रम में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही।
मंगलवार सुबह बरनावा में नदी किनारे अलग ही दृश्य देखने को मिला। ग्रामीण, युवा और बच्चे हाथों में फावड़ा और झाड़ू लेकर सफाई अभियान में जुटे रहे। श्रमदान के दौरान लोगों ने स्वयं नदी किनारे से कचरा हटाया और स्वच्छता का संदेश दिया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अब लोग केवल समस्या सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने के लिए आगे आ रहे हैं।
नदी सभा को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि नदी बचेगी तो ही हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और जीवन का आधार हैं। यदि आज हम सब मिलकर प्रयास नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदी में कचरा न डालें, रासायनिक प्रदूषण को रोकें और समय-समय पर सफाई अभियान चलाएं।
सभा में ग्रामीणों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी गई और बताया गया कि घरों तथा खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट को सीधे नदी में जाने से रोकना जरूरी है। पहले नदी का पानी इतना साफ होता था कि लोग सीधे पी लेते थे, लेकिन अब प्रदूषण के कारण हालात काफी बदल गए हैं।
दरअसल हिंडन नदी पिछले कई वर्षों से प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और प्लास्टिक कचरे के कारण नदी का जल कई स्थानों पर उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। इसका सीधा असर नदी किनारे बसे गांवों के जीवन पर पड़ रहा है।
भारतीय नदी परिषद द्वारा निकाली जा रही यह शोध यात्रा सहारनपुर के शिवालिक क्षेत्र से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद होते हुए गौतमबुद्धनगर तक पहुंचेगी। करीब 355 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान नदी के विभिन्न हिस्सों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच की जा रही है, ताकि प्रदूषण के स्तर का सही आकलन किया जा सके और उसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जा सके।
यह यात्रा केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सीधे जोड़कर व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास भी कर रही है। श्रमदान, पौधारोपण और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि नदी को बचाने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की भी समान जिम्मेदारी है। इस अवसर पर कई अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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