भोपाल , जून 04 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्तावित प्रयास का विरोध करते हुए इसे स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अपमान बताया है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलना भारत के गौरवपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम और साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति से प्रेरित है।

उन्होंने कहा कि मौलाना बरकत उल्ला भोपाली का जन्म 7 जुलाई 1854 को भोपाल में हुआ था और उन्होंने विदेश में रहते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार वर्ष 1915 में गठित भारत की निर्वासित सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रपति और मौलाना बरकत उल्ला पहले प्रधानमंत्री थे।

श्री सिंह ने कहा कि उस सरकार ने अंग्रेजी शासन के अंत के साथ लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद को अपने लक्ष्य के रूप में घोषित किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रयास स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को कमजोर करने की कोशिश है।

माकपा नेता ने कहा कि पार्टी इस प्रस्तावित कदम का विरोध करती है और स्वतंत्रता संग्राम की परंपरा से जुड़े राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से इसके खिलाफ एकजुट होने की अपील करती है।

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