चेन्नई , मई 27 -- रेल अवसंचना को मज़बूत करने और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने को लेकर दक्षिणी रेलवे का चेन्नई मंडल अराक्कोनम रेलवे स्टेशन यार्ड का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण कर रहा है। इस काम में लगभग 97.73 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश किया जाएगा।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त और सबसे रणनीतिक रेलवे जंक्शनों में से एक को तेज़, सुरक्षित और ज़्यादा कुशल परिचालन केंद्र में बदलने वाला है। अराक्कोनम एक अहम गेटवे के तौर पर काम करता है, जो चेन्नई को भारत के उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से जोड़ता है। साथ ही, यह देश के सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल नेटवर्कों में से एक को भी मदद करता है।
दक्षिणी रेलवे ने बुधवार को बताया कि इसकी बढ़ती अहमियत को देखते हुए, दक्षिणी रेलवे के चेन्नई मंडल ने परिचालन लचीलेपन को बेहतर बनाने, क्षमता बढ़ाने और लंबी दूरी के साथ-साथ उपनगरीय यात्रियों के लिए भी ट्रेनों की बिना किसी रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने के वास्ते बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का उन्नयन का काम शुरू किया है।
दक्षिण रेलवे ने कहा है कि इस परियोजना की एक खास बात एक्सप्रेस और उपनगरीय ट्रेनों के संचालन के लिए पटरियों को अलग-अलग करना है। अभी, दोनों सेवाएं एक ही ट्रैक नेटवर्क के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे अक्सर परिचालन रुकावटें आती हैं। जो नए अलग गलियारे बनाए जा रहे हैं, उनसे ट्रेनों की एक साथ आवाजाही मुमकिन हो पाएगी, जिससे समय की पाबंदी में काफी सुधार होगा और यात्रियों का इंतज़ार का समय कम होगा। आधुनिकीकरण के इन कामों से तिरुवलंगाडु में ट्रेनों के संचालन को आसान बनाकर एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए तेज़ सम्पर्क मिलने की भी उम्मीद है। रूटिंग की बेहतर व्यवस्थाओं के साथ, इस खंड से गुज़रने वाली ट्रेनों के यात्रा के समय में लगभग सात मिनट की बचत होने की उम्मीद है, जिससे समय-सारिणी का पालन बेहतर होगा और यात्रियों को ज़्यादा आराम मिलेगा।
रेलवे ने कहा है कि इस परियोजना के हिस्से के तौर पर अराक्कोनम जंक्शन पर यात्रियों की सुविधाओं को भी काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्लेटफॉर्म 3, 4 और 5 को लंबा किया जा रहा है ताकि वे पूरी लंबाई वाली 24-कोच वाली ट्रेनों को अकोमोडेट कर सकें; अभी तक यहाँ सिर्फ़ 18-कोच वाली ट्रेनों को ही हैंडल करने की सीमा थी। इस सुधार से परिचालन लचीलापन बढ़ेगा और लंबी दूरी की ट्रेनों में चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों को ज़्यादा सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, यह परियोजना ट्रेनों की गति और परिचालन कुशलता को बेहतर बनाने पर भी ज़ोर देता है।
यार्ड के चेन्नई छोर पर मौजूदा गैर-मानक लेआउट को हटाने से गति प्रतिबंध समाप्त हो जाएंगे और मुख्य लाइन की ट्रेनों की आवाजाही अधिक सेक्शनल गति पर सुचारू रूप से हो सकेगी। टर्नआउट के माध्यम से मालगाड़ियों के संचालन को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जिसमें अनुमेय गति 10 किमी प्रति घंटा से बढ़ाकर 30 किमी प्रति घंटा की जा रही है, जिससे माल की ढुलाई तेज़ और अधिक कुशल हो सकेगी। परिचालन क्षमता को और मज़बूत करने के लिए, जोलारपेट्टई और रेनिगुंटा दिशाओं की ओर जाने वाली ट्रेनों के एक साथ आगमन और प्रस्थान के लिए उन्नत यार्ड प्रणालियाँ शुरू की जा रही हैं। इन सुधारों से भीड़भाड़ कम होने, स्टेशन के बाहर ट्रेनों के रुकने का समय कम होने और जंक्शन के भीतर समग्र यातायात प्रबंधन में सुधार होने की उम्मीद है।
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