भीलवाड़ा , जून 18 -- पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने हरियालो राजस्थान अभियान की सफलता को केवल पौधारोपण की बड़ी संख्या से नहीं, बल्कि पौधों के जीवित रहने की संख्या से जोड़ने की आवश्यकता बतायी है।
श्री जाजू ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं वन मंत्री संजय शर्मा को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि अभियान के तहत 'अधिक पौधे लगाने के लक्ष्य के बजाय पौधों के पेड़ बनने' की अवधारणा को प्राथमिकता देते हुए गत वर्ष लगाये गये पौधों के जीवित रहने की समीक्षा कराने तथा पौधों के संरक्ष्ण एवं संवर्धन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष हरियालो राजस्थान के तहत प्रदेश में 11 करोड़ 64 लाख पौधे लगाये थे, जिसमें से जीवित पौधों की संख्या की समीक्षा की जरूरत है। उन्होंने पत्र में लिखा कि भीलवाड़ा जिले में लगभग 45.72 लाख पौधे लगाये गये थे और उनकी जियो टैगिंग भी हुई, लेकिन वास्तविक स्थिति में 20 प्रतिशत पौधे भी जीवित नहीं रह पाये। इससे पौधे, धन, समय और श्रम की बर्बादी के साथ-साथ आमजन का पौधारोपण अभियानों पर विश्वास भी कम हुआ है। श्री जाजू ने कहा कि विभागों के पास पौधे लगाने के लिए पर्याप्त स्थान एवं साधन मौजूद नहीं है, ऐसे में हर वर्ष बड़े-बड़े लक्ष्य थौपना अव्यवहारिक है।
श्री जाजू ने जिला प्रशासन से इस वर्ष पौधारोपण का लक्ष्य कम रखने तथा इसके स्थान पर पौधों की सुरक्षा, रखरखाव और उन्हें जीवित रखने का लक्ष्य निर्धारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनाकर पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। उन्होंने स्थानीय जलवायु के अनुरूप नीम, पीपल, बरगद, करंज, शीशम, बेर, जामुन और इमली जैसे दीर्घायु एवं अधिक प्राणवायु देने वाले वृक्षों को प्राथमिकता देने की भी बात कही।
हरियालो राजस्थान अभियान के तहत राज्य सरकार ने भीलवाड़ा जिले के लिए 35 लाख 38 हजार 338 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें पंचायतीराज विभाग को 15.84 लाख, शिक्षा विभाग को 9.04 लाख तथा वन विभाग को 1.98 लाख पौधे लगाने और अन्य विभागों को भी लक्ष्य आवंटित किये गये हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित