नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कृषि तथा संबद्ध क्षेत्र के लिये 1,62,671 करोड़ का प्रस्ताव और किसानों की आमदनी में इजाफा करने के लिए कई उपायों की घोषणा की। यह धनराशि साल 2025-26 के संशोधित अनुमान 1,51,853 से सात प्रतिशत ज़्यादा है।
श्रीमती सीतारमण ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी महंगी फसलों में मदद देने की बात कही है। इन महंगी फसलों में इत्र बनाने में इस्तेमाल होने वाले अगर के पेड़ों और पहाड़ी इलाकों में बादाम, काजू और खुबानी जैसे गिरीदार फलों की बागवानी में सहायता देने का भी ऐलान किया गया। बजट में कहा गया है कि पुराने, कम उपज वाले बागों में दोबारा जान डालने के लिए सरकार आगे आयेगी। इनमें अखरोट, बादाम और पाइन नट्स के बागों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।
चंदन के पेड़ों की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात भी बजट में कही गयी है। सरकार ने कहा कि वह भारतीय चंदन की खेती और इसकी कटाई के बाद होने वाले प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी भागीदारी करेगी।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है। लगभग एक करोड़ किसानों सहित लगभग तीन करोड़ लोग अपनी रोजीरोटी के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उगाने वाले प्रमुख राज्यों में नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए पुराने और कम पैदावार देने वाले पेड़ों को नए पौधों और किस्मों से बदलने का काम किया जाएगा। इसके लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव किया गया है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक और कदम उठाते हुए केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत को कच्चे काजू और कोको की पैदावार व प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा निर्यात बेहतर करने के उपायों पर भी जोर दिया गया है। बजट में भारतीय काजू और भारतीय कोको को वर्ष 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड में मशहूर करने के लिए एक खास कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया है।
इस बजट में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में एक एआई टूल 'भारत-विस्तार' (वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज) की बात कही गयी है। यह कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए आभासी एकीकृत प्रणाली है। यह एक बहुभाषीय एआई टूल होगा जो एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के संसाधनों को एआई प्रणाली से जोड़ेगा। इसका मकसद किसानों को उनकी अपनी भाषा में खास सलाह देना, खेती के जोखिमों को कम करना और पैदावार बढ़ाकर बेहतर फैसला लेने में मदद करना है।
गौरतलब है कि एग्रीस्टैक भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम है जिसे भारतीय सरकार ने विकसित किया है। जिसका उद्देश्य किसानों के लिए एक संपूर्ण डेटाबेस बनाना है जिसमें उनकी पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, ऋण, फसल की जानकारी और बीमा इतिहास के बारे में जानकारी शामिल है। यह खेतों से प्राप्त डेटा और सरकारी एपीआई से मिली जानकारी का उपयोग करता है। एग्रीस्टैक के अंतर्गत विभिन्न डिजिटल उपकरणों और सेवाओं को शामिल किया जाता है।
सरकार ने मछली पालन के लिए कुछ उपायों का ऐलान किया है। इसमें मत्स्य पालन के लिए, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन वैल्यू चेन को मजबूत करने और स्टार्टअप का विकास एवं महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों को आगे ले जाने का प्रस्ताव है। इससे संबंधित प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार मछली किसान उत्पादक संगठनों के साथ बाजार संपर्क बनाने के लिए 500 जलाशयों और अन्य जलाशयों के विकास को जोड़ने की पहल करेगी।
पशुपालन के क्षेत्र के विकास के लिए इस बजट में ध्यान दिया गया है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रमुख क्षेत्रों में से एक हैं। ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार उद्यमिता विकास के तहत पशुपालन क्षेत्र को सहायता प्रदान करने के लिए ऋण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम, पशुधन उद्यमों का संवर्धन और आधुनिकीकरण, पशुधन. डेयरी और मुर्गीपालन के लिए संकेंद्रित मूल्य श्रृंखला का सृजन को संवर्धित करना और पशुधन कृषक उत्पादक संगठनों की स्थापना को प्रोत्साहन देगी।
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