शिमला , मार्च 17 -- हिमाचल प्रदेश रकार ने आगामी बजट सत्र से पहले अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और अन्य राजनीतिक पदाधिकारियों को दी गई "कैबिनेट रैंक" की सुविधा वापस ले ली है।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी ) की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया कि यह फैसला "प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने" के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों को भेजे गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार जैसे पदों को दिया गया कैबिनेट रैंक तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि इन नियुक्त पदाधिकारियों के वेतन या मासिक मानदेय का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर 2026 तक स्थगित रखा जाएगा, जिससे खर्चों में कटौती और वित्तीय संतुलन की कोशिश का संकेत मिलता है।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार को विपक्ष लगातार "अत्यधिक राजनीतिक नियुक्तियों" और कैबिनेट रैंक देने को लेकर घेरता रहा है, खासकर राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए। विपक्ष का आरोप है कि गैर-निर्वाचित व्यक्तियों को कैबिनेट रैंक की सुविधाएं देना, जो आमतौर पर मंत्रियों को मिलती हैं, राज्य के खजाने पर अनावश्यक बोझ डालता है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बजट सत्र में सरकार अपनी वित्तीय नीति और योजनाओं का खाका पेश करने वाली है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश का तुरंत पालन सुनिश्चित करें और अपने अधीन सभी संबंधित विभागों तक इसे पहुंचाएं। इस फैसले का असर उन कई पदाधिकारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब तक कैबिनेट मंत्री के समान प्रोटोकॉल और वित्तीय लाभ मिल रहे थे।
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