नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- लोक सभा के 28 जनवरी को शुरू हुए बजट सत्र की बैठक शनिवार को संपन्न होने के साथ ही सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी।
अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने से पहले कहा कि 18वीं लोक सभा के सातवें सत्र की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों के एक साथ सदस्यों को संबोधित करने के साथ शुरुआत हुई थी। इस सत्र में 31 बैठकें हुईं और इसमें 151 घंटे और 42 मिनट तक कामकाज हुआ।
श्री बिरला ने कहा कि एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया था। बजट पर सामान्य चर्चा लगभग 13 घंटे तक चली और इसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। वित्त मंत्री ने 11 फरवरी को चर्चा का जवाब दिया।
श्री बिरला ने कहा कि सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पुरःस्थापित किये गये और नौ विधेयक पारित किये गये। पारित किये गये कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026, वित्त विधेयक, 2026, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026, केद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक,2026 शामिल हैं।
अध्यक्ष ने कहा कि संविधान संशोधन (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026, और परिसीमन विधेयक, 2026 पर सदन में 16 और 17 अप्रैल को चर्चा हुई और चर्चा 21 घंटे 27 मिनट तक चली। उन्होंने बताया कि तीनों विधेयकों पर चर्चा में 131 सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक सदन द्वारा पारित नहीं किया गया।
चयनित मंत्रालयों/ विभागों की अनुदान मांगों पर सदन में 16 से 18 मार्च तक चर्चा की गयी और तत्पश्चात सदन द्वारा अनुदान मांगों को पारित किया गया। विनियोग विधेयक 18 मार्च, 2026 को लोक सभा में पारित किया गया और वित्त विधेयक 25 मार्च, 2026 को पारित किया गया।
श्री बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 23 मार्च, 2026 को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत के समक्ष आ रही चुनौतियों के बारे में एक वक्तव्य दिया। उन्हाेंने बताया कि सत्र के दौरान, 126 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिये गये। शून्य काल के दौरान सदस्यों ने लोक महत्व के 326 मामले उठाये। सत्र के दौरान नियम 377 के अधीन 650 मामले उठाये गये।
श्री बिरला ने जानकारी दी कि विभागों से सम्बद्ध संसदीय स्थायी समितियों द्वारा 73 प्रतिवेदन प्रस्तुत किये गये और कुल 2089 पत्र सभा पटल पर रखे गये।
तीस मार्च को नियम 193 के अधीन 'वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त करने के प्रयास' विषय पर अल्पकालिक चर्चा हुई। चर्चा छह घंटे सात मिनट तक चली और इसमें 36 सदस्यों ने भाग लिया। यह चर्चा केंद्रीय गृह मंत्री के जवाब के साथ सम्पन्न हुई।
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