शिमला , फरवरी 01 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने कहा है कि बजट में हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे पहाड़ी राज्यों के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

माकपा प्रदेश सचिव संजय चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश राजस्व घाटे वाला राज्य है और गंभीर आर्थिक संकट में है। वर्ष 2023 के बाद भारी बारिश के कारण आपदाओं से राज्य को बड़ा नुकसान हुआ है। इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य को कुछ भी नहीं दिया है। यहां तक कि 16वें वित्त आयोग के तहत राज्य को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान का भी सरकार की मांग के अनुसार साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया है।

श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, साल 2023 और 2025 में आपदा के कारण 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा कम करने के लिए विशेष पैकेज देने की बार-बार मांग की। इसके बावजूद कोई अनुदान नहीं दिया गया है। मौजूदा बजट में भी आपदा से हुए नुकसान के बदले अनुदान का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि बागवानी और पर्यटन दो मुख्य क्षेत्र हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। वित्त मंत्री ने बजट में दोनों क्षेत्रों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड और यूरोपीय परिषद के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद आयात शुल्क कम कर दी गयी है। इसके बहुत बुरे नतीजे होंगे और लाखों सेब किसानों की रोजी-रोटी खतरे में है। मोदी सरकार ने इन समझौतों को करते हुए सेब किसानों के हितों को गिरवी रख दिया है। इसके अलावा बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) को 1,500 करोड़ रुपये से घटाकर सिर्फ एक लाख रुपये कर दिया गया। इस बजट में बाजार हस्तक्षेप योजना के लिए बजट बढ़ाने का भी कोई जिक्र नहीं है।

श्री चौहान ने कहा कि खराब यातायात और भारी बारिश से हुई आपदा के कारण हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की हालत खराब है। बजट में राज्य में हवाई और रेल यातायात के विकास का कोई जिक्र नहीं है।

श्री चौहान ने कहा कि सड़क नेटवर्क की स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसी स्थिति में पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। वित्त मंत्री ने हिमाचल और अन्य पहाड़ी राज्यों में ट्रेकिंग और हाइकिंग ट्रेल्स विकसित करने का उल्लेख किया है, लेकिन उचित हवाई, रेल या सड़क यातायात के बिना इसे जमीन पर उतारना संभव नहीं है। केंद्रीय वित्त मंत्री को राज्य में बेहतर यातायात विकसित करने के लिए बजट प्रदान करना चाहिए था।

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