चंडीगढ़ , फरवरी 01 -- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 ने हरियाणा के औद्योगिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए एक रणनीतिक रोडमैप पेश किया है।

इस बजट में नागरिक विमानों के पुर्जों पर आयात शुल्क हटाने, सी-प्लेन (जल-विमान) विनिर्माण को बढ़ावा देने और बायोफार्मा क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणाएं की गई हैं। इन कदमों से हरियाणा के एक हाई-टेक विनिर्माण और अनुसंधान केन्द्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।

हरियाणा के तेजी से बढ़ते विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को सीधा लाभ पहुंचाते हुए केंद्र सरकार ने नागरिक विमानों के पुर्जों पर आयात शुल्क समाप्त करने का निर्णय लिया है। नीति में आए इस बदलाव से गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की उत्पादन लागत में भारी कमी आने की संभावना है। विशेष एल्यूमीनियम और मिश्र धातुओं जैसे कच्चे माल की लागत कम होने से हरियाणा में निर्मित विमानन पुर्जे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ेगा और उच्च-तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

बजट में "सी-प्लेन सेवा" पहल पर भी विशेष जोर दिया गया है, जो अंबाला, हिसार और करनाल को प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की हरियाणा सरकार की योजना के अनुरूप है। यह उभयचर सेवा न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगी बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। इसके तहत हिसार हवाई अड्डे से नांदेड़ साहिब जैसी उड़ानों के पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हिसार एविएशन हब नई कर छूटों के माध्यम से रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए तैयार है।

बजट में फार्मास्युटिकल क्षेत्र 10,000 करोड़ के राष्ट्रीय निवेश के साथ 'बायोफार्मा शक्ति' योजना की शुरुआत से पंचकूला और उसके आसपास के फार्मा क्लस्टर्स को बड़ी मजबूती मिलेगी। यह निवेश मुख्य रूप से अनुसंधान और विकास (आरएडंडी) तथा घरेलू विनिर्माण पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य कैंसर और मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों के लिए सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है। एसोसिएटेड बायोफार्मा और बायोफार लाइफसाइंसेज जैसी स्थानीय इकाइयां, जो पहले से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों का पालन कर रही हैं, इस प्रोत्साहन से लाभान्वित होंगी।

औद्योगिक विकास के अलावा, बजट ने राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक मांगों पर भी ध्यान दिया है। 16वें वित्त आयोग के ढांचे के तहत, देश भर के ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के विकास के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिसमें से हरियाणा को महत्वपूर्ण संसाधन प्राप्त होंगे। राज्य ने पहले भी केंद्रीय करों में अधिक हिस्सेदारी और 'चिरायु हरियाणा' स्वास्थ्य योजना तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 24 फसलों की खरीद जैसी पहलों के लिए विशेष अनुदान की मांग की थी। यह वित्तीय आवंटन 2026 से 2031 के बीच राज्य के विकास की गति को तेज करने और स्थानीय शासन को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।

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