जयपुर , फरवरी 01 -- किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केन्द्रीय बजट को कृषि एवं किसान के स्थान पर पूंजीपतियों की पूंजी बढ़ोतरी वाला बताते हुए कहा है कि केन्द्र के इस बजट की अनुभूति कृषि प्रधान भारत के बजट जैसी नहीं है।
श्री जाट ने कहा कि बजट के केंद्र बिंदु में कृषि एवं किसान के स्थान पर पूंजीपतियों की पूंजी बढ़ोतरी है। यह 'ऋण मुक्त किसान, समृद्ध हिंदुस्तान' की भावना से कोसों दूर है। अमेरिकी साम्राज्यवाद को पोषित करने के लिए ट्रंप टैरिफ जैसी नीतियों से उत्पन्न वैश्विक उथल-पुथल भरी अस्थिरता के समय ग्राम उद्योगों से परिपूर्ण स्वायत्त गांवों की रचना के लिए चर्चा तक नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसमें युवा भारत का भटकाव रोकते हुए युवाओं का तनाव एवं उनके परिजनों की चिंता समाप्त करने की दिशा में प्रत्येक गांव को औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने को अनदेखा किया गया है। स्वाभिमानी भारत बनाने के लिए गरीब को छप्पर निर्माण में सक्षम बनाने के स्थान पर पूर्व से चली आ रही 'गरीब को छप्पर' वाली घिसी पिटी नीति ही अपनाई गयी है। मांग-आपूर्ति के आधार पर अर्थ चक्र को गतिमान बनाने के लिए अधिकतम उपभोक्ताओं की जेब में पैसा आने की नीति के क्रियान्वयन की दिशा में सार्थक पहल नहीं की गई है, इसीलिए सरकारों की व्यक्त प्रतिबद्धताओं के अनुसार कृषि उपजो के लाभकारी मूल्य प्रदान करने के लिए 'न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून' बनाने की घोषणा नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि इस बजट में 52 प्रतिशत जीविकोपार्जन उपलब्ध कराने वाला कृषि क्षेत्र उपेक्षित है।
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