रायपुर, जनवरी 19 -- छत्तीसगढ़ में इस सत्र की धान खरीदी का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे प्रदेश भर के लाखों किसान चिंता और आक्रोश में हैं। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सोमवार को राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। श्री बघेल ने सरकार से तत्काल धान खरीदी की अवधि को एक माह बढ़ाने की मांग की है, ताकि सभी किसान अपनी उपज बेच सकें।
श्री बघेल के अनुसार, खरीदी शुरू होने के लगभग 50 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। प्रदेश के अधिकांश खरीदी केंद्रों पर भारी अव्यवस्था और देरी के चलते किसानों को दिनोंदिन परेशानी बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर तो खरीदी केंद्रों पर ही धान के ढेर पड़े हैं, जिनका उठाव नहीं हो पा रहा है, जबकि नए धान की खरीदी भी इसी कारण रुकी हुई है।
मुख्य समस्या सरकार द्वारा लागू किए गए 'एग्री स्टेक' पोर्टल में बताई जा रही है। किसानों का आरोप है कि इस पोर्टल से टोकन लेने में तकनीकी गड़बड़ियां आ रही हैं। कई किसानों का रकबा (कृषि क्षेत्र) गलत दर्ज है, जिसके कारण उन्हें परमिट ही नहीं मिल पा रहा। साथ ही, प्रति किसान खरीदी की सीमा भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है, जिसे किसान अपने वास्तविक उत्पादन से कम बता रहे हैं।
इन हालातों से नाराज किसान विभिन्न जिलों में आंदोलन पर उतर आए हैं। कांकेर जिले के ग्राम बारकोट के किसानों ने अपनी समस्या लेकर जिला कलेक्टर से मिलने के लिए लगभग 150 किलोमीटर पैदल यात्रा की, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल सका। किसान नेता सरकार पर जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं।
श्री बघेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है। उनके अनुसार, सरकार धान खरीदी में अड़चनें पैदा करके किसानों को हताश करना चाहती है, ताकि वे मजबूर होकर अपना धान बिचौलियों के पास कम दामों पर बेच दें। इस तरह सरकार को राज्य स्तर पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी करने से बचना होगा और सीधे बाजार या व्यापारियों से सस्ते में अनाज ले सकेगी।
श्री बघेल ने चेतावनी दी कि अगर खरीदी की गति यही रही, तो निश्चित समय सीमा में प्रदेश के 27 लाख से अधिक किसानों का धान नहीं खरीदा जा सकेगा। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा, उन पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा और खेती-किसानी के प्रति हतोत्साहन पैदा होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से हस्तक्षेप करके व्यवस्था को दुरुस्त करने और किसानों के हित में खरीदी अवधि बढ़ाने की अपील की है।
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