रायपुर , अगस्त 31 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब सरकार के पास पैसा नहीं है तो विकास और जनकल्याण के काम कैसे होंगे। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली में स्पष्टता नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर अधिकारियों के कामकाज पर भी पड़ रहा है।
इस बीच कांग्रेस ने नीति आयोग की 'वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट' का हवाला देते हुए राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस का दावा है कि छत्तीसगढ़ इस रिपोर्ट में 18 राज्यों में 17वें स्थान पर है। पार्टी के अनुसार राज्य का वित्तीय अनुशासन स्कोर एक साल में 56 से गिरकर 7.4 हो गया है।
कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य का राजकोषीय घाटा तय लक्ष्य 2.99 प्रतिशत के मुकाबले 5.32 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पार्टी के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार पर कुल कर्ज करीब 1.79 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा करीब 18,900 करोड़ रुपए था, जबकि चालू वित्त वर्ष में इसके 20,400 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है।
कांग्रेस ने कहा कि सरकार की आय में बढ़ोतरी के बावजूद कर्ज और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पार्टी ने इस स्थिति को लेकर सरकार से नीति आयोग की रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
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