बक्सर , मई 17 -- प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब ने रविवार को कहा कि न्यायालयीय प्रक्रिया और कार्य संपादन की कला का कुशल प्रशिक्षण न्यायिक कर्मियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। न्यायाधीश काजल झांब ने व्यवहार न्यायालय बक्सर में नवनियुक्त लिपिकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहा कि न्यायालय का परिवेश विश्वविद्यालय के वातावरण से अलग होता है और यहां कार्यरत कर्मियों को संवेदनशीलता, अनुशासन तथा व्यवहार कुशलता के साथ कार्य करना पड़ता है।उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि यह गर्व का विषय है कि वे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग हेतु इस सम्मानजनक सेवा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि समाज से पीड़ित और निराश लोग न्याय की उम्मीद लेकर न्यायालय पहुंचते हैं तथा उनकी पहली मुलाकात न्यायालय कर्मियों से ही होती है। ऐसे में कर्मियों का व्यवहार ही न्यायालय की साख और गरिमा निर्धारित करता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला तथा न्यायिक दंडाधिकारी सह नोडल अधिकारी चंदन कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रभारी प्रशासन न्यायालय राजीव कुमार श्रीवास्तव, नाजिर संतोष कुमार द्विवेदी, रजनीकांत मिश्र, सिस्टम ऑफिसर विजय कुमार सिंह तथा नायब नाजिर दीपक गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

प्रशिक्षण के दौरान नए कर्मचारियों को न्यायालयीय कार्य प्रणाली, पत्राचार की प्रक्रिया, विभिन्न न्यायिक रजिस्टरों के संधारण तथा न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में अविनाश कुमार, दीक्षित कुमार, रविशंकर झा, राहुल कुमार, मंजुला कुमारी, कोमल सिंह, सोनम कुमारी, प्रिया कुमारी, कहकशां परवीन, सतीश कुमार, राजेश कुमार सहित अन्य नव नियुक्त कर्मचारी उपस्थित थे।

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