चम्पावत , सितम्बर 22 -- उत्तराखंड के चंपावत जिला प्रशासन ने मंगलवार को पाटी विकासखंड के भोखड़ा (मंगललेख) स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन में पशुओं को रखे जाने के मामले का संज्ञान लेते हुए स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान भवन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई तथा सरकारी परिसंपत्ति को सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।

जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी भरत जोशी ने निरीक्षण के बाद बताया कि यह विद्यालय छात्र संख्या शून्य हो जाने के कारण वर्ष 2017 से संचालित नहीं है और वर्तमान में यहाँ कोई शैक्षणिक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय बंद होने के बावजूद क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं हुई क्योंकि पास के विद्यालय रमक में उनके अध्ययन की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।

ग्राम प्रधान मंगललेख नरेश आर्या ने बताया कि वर्ष 2017 में विद्यालय बंद होने के बाद क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा और बच्चे नजदीकी विद्यालयों तथा राजकीय इंटर कॉलेज रमक में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पूर्व प्रधान प्रतिनिधि मंगल जोशी ने भी बताया कि रमक, मंगोली एवं बासली सहित आसपास के क्षेत्रों के बच्चे समीपवर्ती प्राथमिक विद्यालयों तथा राजकीय इंटर कॉलेज रमक में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। विशेष रूप से पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कम अथवा शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों को स्थानीय परिस्थितियों एवं विद्यार्थियों की सुविधा के अनुसार नजदीकी विद्यालयों से जोड़ने तथा आवश्यकतानुसार समायोजित करने की व्यवस्था की जाती है, ताकि विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक, बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं अन्य सुविधाएं मिल सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी विद्यालय परिसरों एवं विद्यालय समूहों के माध्यम से संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने पर बल दिया गया है। इसी दिशा में संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ सरकारी परिसंपत्तियों का संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। बंद अथवा समायोजित विद्यालय भवनों को सुरक्षित रखने और उनके अनधिकृत उपयोग को रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही नियमानुसार जनहित में इनके बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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