अलवर , अक्टूबर 13 -- राजस्थान में खैरथल - तिजारा जिले के भिवाड़ी शहर और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों के बढ़ते आतंक से छुटकारा पाने के लिये पार्षदों ने नगर परिषद परिसर स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया।
पार्षद किशन नागर ने मंगलवार को बताया कि यह किसी के विरोध में धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के प्रति आस्था और अधिकारियों-विधायक की ओर से दिए गए सुझाव के अनुरूप किया जा रहा है। अगले शनिवार तक बंदरों को पकड़ने के लिए ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो प्रत्येक वार्ड में नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। पार्षदों का कहना है कि बंदरों के हमलों से आमजन, महिलाएं और बच्चे परेशान हैं। बंदरों के काटने और हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। किशन नागर ने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि एक महिला बंदरों के हमले के बाद लंबे समय तक चारपाई पर रहने को मजबूर रही, जबकि हाल ही में एक 10 वर्षीय बालिका को बंदरों ने काट लिया और उसके कपड़े तक फाड़ दिए। इस घटना से परिवार में दहशत फैल गई।
इससे पहले नगर परिषद की पिछली साधारण सभा में भी पार्षदों ने बंदरों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। पार्षदों ने अधिकारियों से सवाल किया था कि बंदरों के आतंक से कब राहत मिलेगी।
स्थानीय स्तर पर बंदरों को पकड़ने वाला विशेष दल उपलब्ध नहीं होने के कारण अब मथुरा क्षेत्र के दल से संपर्क किया गया है। नगर परिषद आयुक्त सुरेश कुमार मीणा के अनुसार, यह दल एक-दो दिन में पहुंच सकता है। इसके बाद जिन वार्डों में बंदरों की समस्या अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयुक्त सुरेश कुमार मीणा ने बताया कि बंदरों की समस्या को देखते हुए विशेष दल बुलाने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि प्रभावित वार्डों में अधिक से अधिक बंदरों को पकड़कर आबादी से दूर छोड़ा जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि मथुरा से बुलाये जा रहे दल बंदरों को पकड़ने के लिए है, आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए नहीं।
नगर परिषद क्षेत्र में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। अधिकारियों के अनुसार, पहले भी इस समस्या के समाधान के लिए टेंडर जारी किया गया था, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। ऐसे में बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
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