(जयंत रॉय चौधरी से)कोलकाता , अप्रैल 12 -- सुबह का वक्त है। कोलकाता का रासबिहारी एवेन्यू कारों, ऑटोरिक्शा, बसों और पैदल यात्रियों की आवाजाही से ठसाठस भरा पड़ा है। सड़क किनारे चाय की दुकानों पर केतली सजी हुई है, लोग गरमा-गरम चाय की चुस्कियों ले रहे हैं और साथ में स्थानीय समाचारों तथा खाड़ी युद्ध की चर्चाओं के चटखारे भी लगा रहे हैं।

सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन चाय प्रेमियों की इस भीड़ को गौर से देखने पर मालूम होता है कि इनमें से ज्यादातर लोग या तो मध्यम आयु वर्ग के हैं या फिर बुजुर्ग। इस दृश्य से अनायास ही यह भाव मन में उभर आता है, मानो, युवाओं ने देश की इस पूर्व राजधानी को जैसे त्याग दिया है।

पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध बुद्धिजीवी स्वपन दासगुप्ता ने चाय की चुस्की लेते हुए 'यूनीवार्ता' को बताया, "यह शहर एक बड़े वृद्धाश्रम (रिटायरमेंट होम) में तब्दील हो गया है। युवा उन शहरों की ओर पलायन कर गए हैं जहाँ नौकरियां हैं। भारत की तकनीकी राजधानी बेंगलुरु में आज करीब 12 लाख बंगाली काम कर रहे हैं।"राज्य विधानसभा चुनावों में रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दिग्गज नेता देबाशीष कुमार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार श्री दासगुप्ता ने कहा, "आजादी के समय अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में बंगाल दूसरे नंबर का राज्य था। आज, यह वास्तव में बहुत नीचे गिर गया है।"आंकड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल आर्थिक स्तर पर देश का छठा सबसे बड़ा राज्य बना हुआ है, जिसका वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 20.31 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, यह आंकड़ा इस सच्चाई को छिपा देता है कि देश के जीडीपी में पश्चिम बंगाल का योगदान 1960-61 के 10.5 प्रतिशत से गिरकर 2024 में मात्र 5.6 प्रतिशत रह गया है, क्योंकि इसका उद्योग घटा है और अन्य राज्य इससे आगे निकल गए हैं।

राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1960 के दशक में राष्ट्रीय औसत के 127.5 प्रतिशत से गिरकर 2024 में 83.7 प्रतिशत रह गई है तथा प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य 22वें स्थान पर खड़ा है।

रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सब्यसाची बसु राय चौधरी ने कहा, "जूट जैसे पारंपरिक उद्योगों में गिरावट, 1970 के दशक में नीतिगत बदलावों, उग्र श्रमिक आंदोलनों और 1991 के बाद के उदारीकरण का लाभ उठाने में विफलता जैसे कारकों ने विकास को बाधित किया, जबकि तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़ गए।"आईआईटी खड़गपुर, भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई), प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय और जादवपुर विश्वविद्यालय जैसे देश के शीर्ष संस्थान होने के बावजूद बंगाल दूसरे शहरों में स्थित तकनीकी कंपनियों को प्रतिभाएं प्रदान कर रहा है।

हालांकि साल्ट लेक में राज्य का 'टेक सिटी' पिछले कुछ वर्षों में रफ्तार पकड़ने लगा है, लेकिन उच्च वेतन वाली अधिकांश नौकरियां शहर के बाहर हैं।

श्री दासगुप्ता ने 'विनिर्माण विरोधी धारणा' का मुद्दा उठाते हुए तर्क दिया कि निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। टाटा समूह के नैनो प्रोजेक्ट के सिंगूर से बाहर चले जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वह धारणा आज भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा, "अगर टाटा यहां प्रबंधन नहीं कर सके, तो छोटे उद्यम वसूली और विरोध की राजनीतिक संस्कृति में कैसे जीवित रह सकते हैं?" उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले चौदह सालों में करीब 6,688 कंपनियों ने अपने पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित कर दिए।

श्री दासगुप्ता ने दावा किया, "अपनी भौगोलिक स्थिति के लाभ के बावजूद, देश के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का मात्र एक प्रतिशत पश्चिम बंगाल में आया है।"औद्योगिक गिरावट के बावजूद, राज्य ने पिछले दशक में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 130 प्रतिशत की शानदार वृद्धि देखी है। इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा सेवा क्षेत्र से आया है, जो पश्चिम बंगाल की जीडीपी में 54.9 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके अतिरिक्त खेती से 21.1 प्रतिशत का योगदान प्राप्त होता है।

प्रसिद्ध राजनीति विज्ञानी बसु राय चौधरी ने कहा, "तथ्यात्मक साक्ष्य बताते हैं कि साल्ट लेक सेक्टर वी ने बड़ी संख्या में आईटी और टेक कंपनियों को आकर्षित किया है, जो कोविड महामारी के बाद कम किराए और तकनीकी कर्मचारियों की प्रचुर उपलब्धता के कारण वहां स्थानांतरित हो गई हैं।"न्यू टाउन में एक नया बंगाल सिलिकॉन वैली टेक हब (250 एकड़ का टेक्नोलॉजी पार्क) से आने वाले वर्षों में एक लाख और नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल इंटरनेट उपयोग में भारत में तीसरे स्थान पर है, यहाँ करीब सात करोड़ उपयोगकर्ता हैं।

बसु राय चौधरी ने कहा, "तकनीकी क्षेत्र में यह विकास काफी हद तक इसलिए हुआ क्योंकि राज्य ने अनुकूल डिजिटलीकरण नीतियों के साथ इसका समर्थन किया है।"इन सभी स्थितियों के बावजूद राज्य अब भी प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक बना हुआ है। 2024 तक, राज्य की जीडीपी का 22.9 प्रतिशत व्यापार, होटल और संचार से आया, जिसमें व्यापार की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।

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