कोलकाता , अगस्त 4 -- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सदस्यता अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है और अगले आदेश तक अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं को शामिल करने से इनकार कर दिया है।
पार्टी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
यह फैसला राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रतिद्वंद्वी दलों, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के भाजपा में शामिल होने की बढ़ती राजनीतिक अटकलों के बीच आया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि इस चरण में विस्तार से ज्यादा संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता दी जायेगी।
पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पहले घोषणा की थी कि नये सदस्यों का पंजीकरण स्थगित रहेगा। यही संदेश पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बंसल ने भी दिया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व से नये निर्देश मिलने तक राज्य में मोर्चों, मंडलों या जिला इकाइयों सहित किसी भी संगठनात्मक स्तर पर नयी सदस्यता जारी नहीं की जायेगी।यहां तक कि मौजूदा सदस्यों की सदस्यता का नवीनीकरण भी फिलहाल रोक दिया गया है।
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता देवाजीत सरकार ने कहा कि पार्टी सदस्यता देने के लिए एक तय संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन करती है, जो केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही शुरू होती है।
श्री सरकार ने कहा, "पश्चिम बंगाल में चार मई को भाजपा सरकार के गठन के बाद से राज्य में कोई नयी सदस्यता जारी नहीं की गयी है। इस अवधि में भाजपा सदस्य बनने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को पार्टी ने मान्यता नहीं दी है। वर्तमान में केवल वही लोग भाजपा के सदस्य हैं, जिनके पास पहले से जारी वैध सदस्यता है।"उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से गठित जिला स्तरीय समितियां फिलहाल मौजूदा सदस्यों के रिकॉर्ड, सदस्यता नवीनीकरण और भविष्य में पंजीकरण की रूपरेखा की समीक्षा कर रही हैं। इन समितियों की सौंपी गयी रिपोर्ट ही इस बात का आधार बनेगी कि केंद्रीय नेतृत्व सदस्यता अभियान कब और कैसे फिर से शुरू करेगा।
श्री सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि भाजपा का समर्थन करने से कोई व्यक्ति अपने आप पार्टी का सदस्य नहीं बन जाता।उन्होंने कहा, "भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में काम करने वाला एक बड़ा संगठनात्मक मंच है। कई लोग पार्टी का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन सदस्यता निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया को पूरा कर ही प्राप्त की जा सकती है। वह प्रक्रिया वर्तमान में स्थगित है।"राजनीतिक हलकों में इस घोषणा को एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि भाजपा राज्य में सत्ता संभालने के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर दलबदल को बढ़ावा नहीं देना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के भाजपा में शामिल होने की उत्सुकता की व्यापक अटकलों के बावजूद प्रदेश नेतृत्व ने फिलहाल किसी भी नये प्रवेश से इनकार किया है।
श्री भट्टाचार्य ने कहा है कि पार्टी दलबदल से प्रेरित राजनीति को बढ़ावा नहीं देगी और संगठनात्मक पारदर्शिता तथा अनुशासन उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। भाजपा ने इससे पहले मिस-कॉल प्रणाली के जरिए सदस्यता पंजीकरण कराया था।
श्री सरकार के अनुसार, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उस व्यवस्था को बंद कर दिया गया था और जब तक केंद्रीय नेतृत्व सदस्यता अभियान के अगले चरण की घोषणा नहीं करता, तब तक यह निलंबित ही रहेगी।
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