जयंत रॉय चौधरी सेकोलकाता , मई 09 -- पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निर्णायक जीत ने केवल राज्य की राजनीति ही नहीं बदली है, बल्कि भारत-बंगलादेश संबंधों और पूर्वी सीमा क्षेत्र की रणनीतिक समीकरणों को भी नये सिरे से प्रभावित किया है।

कई सालों तक भारत-बंगलादेश की नदी जल बंटवारे की राजनीति न सिर्फ कूटनीति के कारण, बल्कि देश की अंदरूनी संघीय राजनीति के कारण भी बाधित रही। तीस्ता नदी पर किसी भी समझौते को अंजाम देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति भी ज़रूरी थी, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार लगातार इस व्यवस्था को यह कहकर नकारती रही कि यह राज्य के किसानों के हित में नहीं होगी।

भाजपा सरकार आने के बाद तीस्ता जल बंटवारा, सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासन और चीन की बढ़ती भूमिका जैसे मुद्दों पर अब नयी राजनीतिक परिस्थितियों के बीच नयी दिशा उभरती दिख रही है।

शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने की संभावना से केन्द्र और राज्य में "डबल इंजन" व्यवस्था बनेगी, जिससे भारत को बंगलादेश के साथ लंबित मुद्दों पर अधिक समन्वित ढंग से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। तीस्ता समझौते को लेकर चुनौतियां बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि उत्तर बंगाल की कृषि और सिंचाई व्यवस्था इस नदी पर काफी निर्भर है और भाजपा का नया जनाधार भी इसी क्षेत्र में मजबूत हुआ है।

पूर्व भारतीय उच्चायुक्त पिनाक आर चक्रवर्ती कहते हैं कि बंगलादेश द्वारा तीस्ता परियोजना में चीन को शामिल करने और भारत की प्रतीक्षा न करने जैसी टिप्पणियां स्थिति को जटिल बना सकती हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत के रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट चीनी भागीदारी पर चिंता जतायी।

बंगलादेश पहले ही चीन के साथ सैन्य ड्रोन निर्माण समझौते की दिशा में बढ़ चुका है। उसकी नौसेना जहां पहले ही चीन में बनी पनडुब्बियां, नौसैनिक पोत, रडार और विमान इस्तेमाल कर रही है, वहीं वायुसेना भी कथित रूप से चीन में बने 20 जे-10सी लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की पूर्वी सीमा पर सामरिक दबाव बढ़ सकता है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शांतनु मुखर्जी ने आशंका जतायी कि पाकिस्तान की आईएसआई ने बंगलादेश में अपनी गतिविधियां बढ़ायी हैं और चीन, पाकिस्तान तथा तुर्किये के साथ संभावित खुफिया सहयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह भी उल्लेखनीय है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच जो तनावपूर्ण माहौल बना था, उसमें कुछ नरमी आने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। भारत बंगलादेश के नये प्रधानमंत्री तारिक रहमान का स्वागत करने वाला पहला देश था। अब भारत को उम्मीद है कि नयी सरकार व्यापार तथा संपर्क परियोजनाओं को फिर से गति देगी।

बंगलादेश की प्राथमिकताओं में गंगा जल संधि का नवीनीकरण भी शामिल है, जिसकी अवधि इस वर्ष दिसंबर में समाप्त हो रही है। दोनों देशों के बीच प्रारंभिक बातचीत शुरू हो चुकी है और हाइड्रॉलिक आंकड़ों का आदान प्रदान भी हो चुका है, हालांक संधि समापन की तारीख करीब होने के कारण आकलन किया जा रहा है कि इसे अस्थायी रूप से बढ़ाकर अंतिम फैसला अगले साल ही लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी ग्लेशियरों से जल प्रवाह में कमी के कारण किसी दीर्घकालिक और निश्चित जल हिस्सेदारी पर सहमति आसान नहीं होगी।

मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ सदस्य उत्तम सिन्हा कहते हैं, "भारत बेशक बंगलादेश के साथ संधि पर काम करेगा, लेकिन गंगा को पानी देने वाले हिमालयी ग्लेशियरों से पानी का बहाव कम हो रहा है, और साझा की जा सकने वाली पानी की मात्रा पर पक्की गारंटी देना एक समस्या खड़ी कर देगा।"भारत की ओर से बंगलादेशी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में और ढील देने की संभावना जतायी गयी है, खासकर चिकित्सा, शिक्षा और व्यापारिक यात्राओं के लिए। लेकिन अवैध प्रवासन और कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर चिंताओं के कारण यह प्रक्रिया सीमित और नियंत्रित रहने की संभावना है।

जानकारों का मानना है कि अवैध प्रवासन को लेकर दोनों पक्षों की बयानबाज़ी में आई तेज़ी, जल विवादों या मोहम्मद यूनुस की उन पिछली टिप्पणियों से भी कहीं ज़्यादा संबंधों में तनाव पैदा कर सकती है, जिनमें उन्होंने यह संकेत दिया था कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र समुद्र तक पहुंच के लिए बंगलादेश पर निर्भर है।

पश्चिम बंगाल भाजपा नेतृत्व में स्वपन दासगुप्ता जैसे बंगलादेश मामलों की समझ रखने वाले नेताओं की मौजूदगी और ढाका में नये भारतीय राजदूत के रूप में व्यवसायी से राजनेता बने दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति से दोनों देशों के रिश्तों में संतुलन और व्यावहारिकता बढ़ सकती है। इसके बावजूद सीमा पार राजनीतिक बयानबाजी और अविश्वास आने वाले समय में संबंधों की सबसे बड़ी परीक्षा बने रह सकते हैं।

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