कोलकाता , फरवरी 21 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी के लिए रूपरेखा जारी की है और इस प्रक्रिया में जिला सत्र न्यायाधीशों की सेवाएं ली जाएंगी।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि जिलों में तैनात लगभग 150 सत्र न्यायाधीश एसआईआर से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई एवं निस्तारण का कार्य संभालेंगे। इसके अलावा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के सात सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नामों पर भी चर्चा हुई, जिन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने पर विचार किया गया है।
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिव्येंदु दास और अरिंदम नियोगी, साथ ही निर्वाचन आयोग के विधि महानिदेशक विजय पांडे उपस्थित रहे। राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भी विचार-विमर्श में शामिल हुए।
बैठक के बाद श्री अग्रवाल ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय पूर्ण सहयोग देगा और विधानसभा-वार आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सभी पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है।
यह पूरी कवायद शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के उस आदेश के बाद शुरू हुई, जिसमें पश्चिम बंगाल में एसआईआर की निगरानी के लिए सेवारत या सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच "विश्वास की कमी" के कारण यह कदम उठाना आवश्यक हो गया है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ममता बनर्जी सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप से एसआईआर प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
उच्च न्यायालय की अधिसूचना के साथ अब राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर प्रक्रिया में व्यापक न्यायिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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