नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन और तार्किक विसंगति के कारण हटाए गए नामों के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों में से 47 लाख का निपटारा 31 मार्च की शाम तक कर लिया गया है, और शेष 13 लाख मामलों का फैसला सात अप्रैल तक कर दिया जाएगा।

इस मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ कर रही है। न्यायालय को बताया गया कि लगभग 700 न्यायिक अधिकारी (जिसमें पश्चिम बंगाल के 500 और ओडिशा व झारखंड के 200 अधिकारी शामिल हैं) प्रतिदिन लगभग दो लाख मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। दावों और आपत्तियों पर आने वाले फैसलों के खिलाफ अपील सुनने के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण गठित किए गए हैं। इनकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश कर रहे हैं।

चुनाव आयोग की ओर इन न्यायाधीशों के लिए आयोजित 'ओरिएंटेशन प्रोग्राम' पर आपत्ति जताई तो इस पर न्यायमूर्ति बागची ने इसे खारिज करते हुए कहा कि चूंकि न्यायाधीश अपने नियमित न्यायिक कार्य से अलग जिम्मेदारी निभा रहे हैं, इसलिए यह प्रक्रिया उचित है।

न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को वर्तमान चुनाव में तुरंत वोट देने का अधिकार मिल जाएगा। वोट देने की पात्रता चुनाव आयोग द्वारा तय की गई पात्रता तिथि पर निर्भर करती है।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि तार्किक विसंगति सूची के 60 लाख नामों में से अब तक लगभग 55 प्रतिशत को शामिल कर लिया गया है, जबकि 45 प्रतिशत को बाहर रखा गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित