कोलकाता , मार्च 26 -- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आयोग ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में "दागी अधिकारियों" को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है, जो कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाने के लिए तैनात किए गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस नेता एवं राज्य के मंत्री ब्रात्य बसु ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन जिन अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, उनका पिछला रिकॉर्ड संदिग्ध रहा है।

श्री बसु ने आरोप लगाया कि गाजोल विधानसभा क्षेत्र में नियुक्त सामान्य पर्यवेक्षक महाराष्ट्र में अपने कार्यकाल के दौरान 8000 करोड़ रूपये के एंबुलेंस घोटाले में आरोपी रह चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बोंगांव दक्षिण सीट के लिए नियुक्त अधिकारी मध्य प्रदेश के सतना में कलेक्टर रहते हुए 40 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामले में आरोपी था। उनके अनुसार एक जांच समिति ने उसे दोषी पाया था, हालांकि बाद में उसे क्लीन चिट दे दी गयी।

श्री बसु ने यह भी कहा कि बालीगंज सीट के पर्यवेक्षक पर पहले दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज हो चुका है, जबकि मध्यग्राम सीट के पर्यवेक्षक अरिंदम डकुआ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निजी सचिव रह चुके हैं।

तृणमूल कांग्रेस सांसद शाओनी घोष ने भी आरोप लगाया कि कई पर्यवेक्षकों का "संदिग्ध रिकॉर्ड" रहा है और उनकी नियुक्ति गलत मंशा से की गई है।

सुश्री घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है और अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बसिरहाट के एक बूथ में 340 मतदाताओं, जो कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय से थे, के नाम सूची से हटा दिए गए।

तृणमूल कांग्रेस ने इन घटनाओं को चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने वाला बताया है। इन आरोपों पर चुनाव आयोग या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। चुनाव नजदीक आने के साथ इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित