कोलकाता , सितंबर 17 -- पश्चिम बंगाल के मछली व्यापारियों ने पड़ोसी राज्य झारखंड में मछली ले जाते समय कथित रूप से उत्पीड़न एवं जबरन वसूली का सामना करने का आरोप लगाया है। व्यापारियों का कहना है कि झारखंड में घुसते ही मछली से लदे वाहनों को रोक लिया जाता है और चालकों को धमकाया जाता है।

कथित घटनाओं के संबंध में बुधवार रात शिबदासपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है।

नैहाटी के राजेंद्रपुर के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें झारखंड तक मछली पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजेंद्रपुर मछली मंडी एशिया की सबसे बड़ी मछली मंडियों में से एक है, जहां से भारत के कई हिस्सों और विदेशों में भी मछली भेजी जाती है।

व्यापारियों का कहना है कि हाल के हफ़्तों में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं; आरोप है कि झारखंड बॉर्डर पर गाड़ियों को रोका जा रहा है और उनसे भारी रकम की मांग की जा रही है।

व्यापारियों के अनुसार, जो चालक पैसे देने से मना करते हैं उन्हें कथित तौर पर धमकाया जाता है और उनके साथ मारपीट की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मछलियों पर ज़हरीले पदार्थ डालकर उनकी खेप को जान-बूझकर बर्बाद किया जा रहा है।

व्यापारियों का दावा है कि ऐसी घटनाओं में लगभग 18 लाख रुपये की मछली ले जा रही करीब सात गाड़ियां प्रभावित हुई हैं। इस मामले को बंगाल के मत्स्य मंत्री राजेश महतो के संज्ञान में भी लाए जाने की उम्मीद है। व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस मुद्दे को उठाने के लिए मंत्री से मिल सकता है।

सुगत घोष, मत्स्य बाजार विकास समिति के अध्यक्ष, ने कहा कि निर्यातकों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

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