कोलकाता , जुलाई 10 -- पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24-परगना जिले की एक महिला ने डायमंड हार्बर सीट से लोक सभा सांसद अभिषेक बनर्जी और 10 अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में एक शिकायत दर्ज करायी है, जिसमें उसने आरोप लगाया है कि श्री बनर्जी समर्थित 'सेवाश्रय' चिकित्सा शिविर में लापरवाही से किये गये इलाज के कारण उसका एक पैर काटना पड़ा।
दक्षिण 24-परगना के आकरा की रहने वाली शिकायतकर्ता मालती बिस्वास ने रबींद्रनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि चिकित्सा शिविर में इलाज कराने के बाद वह स्थायी रूप से अपंग हो गयी हैं। इन आरोपों को लेकर श्री बनर्जी या 'सेवाश्रय' पहल के आयोजकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है।
शिकायत के अनुसार, सुश्री बिस्वास घुटने के लगातार दर्द के इलाज के लिए 'सेवाश्रय' शिविर में गयी थीं। प्राथमिक जांच के बाद शिविर के डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएं दी थीं। कथित तौर पर दवा लेने के तुरंत बाद उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और दर्द और बढ़ गया। वह जब बिगड़ते लक्षणों के साथ दोबारा शिविर में लौटीं, तो उन्हें एम आर बांगुर अस्पताल भेज दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि उनके पैर की स्थिति गंभीर हो गयी है और उन्हें पार्क सर्कस स्थित चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में भेज दिया।
इसके बाद उन्हें नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा। सुश्री बिस्वास ने आरोप लगाया है कि इस घटना के बाद उनके परिवार ने श्री बनर्जी और 'सेवाश्रय' शिविर के आयोजकों से संपर्क करने के कई प्रयास किये, लेकिन उनकी ओर से कोई सहायता या प्रतिक्रिया नहीं मिली।
राज्य में सरकार बदलने के बाद, उन्होंने और उनके परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज करायी। इन आरोपों ने 'सेवाश्रय' पहल के कामकाज को लेकर भाजपा नेता अभिजीत दास द्वारा पहले किये गये दावों को फिर से हवा दे दी है।
श्री दास ने पहले आरोप लगाया था कि इन शिविरों में एलोपैथिक इलाज प्रदान करने के लिए गैर-पंजीकृत चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों और होम्योपैथी डॉक्टरों को काम पर लगाया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि शिविरों में जारी किये जाने वाले पर्चों में अक्सर बुनियादी चिकित्सा विवरण गायब होते थे, जिनमें बीमारी की पहचान और इलाज करने वाले डॉक्टर का पंजीकरण नंबर शामिल नहीं होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्ट्रासाउंड उपकरण चलाने के लिए अनिवार्य नियामक स्वीकृतियां नहीं ली गयी थीं और शिविरों में वितरित दवाओं की गुणवत्ता तथा वैधता पर भी सवाल उठाये थे।
श्री दास ने पहले इन आरोपों से जुड़ी एक शिकायत डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक को सौंपी थी। पुलिस ने अभी तक इस शिकायत पर कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही इसकी पुष्टि की है कि जांच शुरू की गयी है या नहीं।
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