कोलकाता , अगस्त 09 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगुर में औद्योगीकरण को पुनर्जीवित करने के लिए नये सिरे से प्रयास शुरू कर दिये हैं, जो पिछले लगभग 15 वर्षों से किसी बड़े उद्योग या खेती के बिना पड़ा हुआ है।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तापस रॉय ने आज कहा कि राज्य में निवेश के अवसरों की संभावना तलाशने के लिए सरकार ने टाटा समूह से फिर से संपर्क साधा है। नबन्ना में पत्रकार वार्ता में श्री रॉय ने सिंगुर घटनाक्रम को लेकर पिछली सरकार की आलोचना की और तर्क दिया कि वह फैसला बलपूर्वक थोपा गया था।
श्री रॉय ने कहा, "सिंगुर ने पिछले 15 वर्षों में न तो उद्योग देखा है और न ही कृषि। हम सिंगुर के बारे में बहुत गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हम राज्य में उद्योग की समग्र स्थिति को बदलने के लिए उत्सुक हैं। हम टाटा समूह से संपर्क बनाये हुए हैं, ताकि उन्हें राज्य में वापस लाया जा सके।" उन्होंने कहा कि सरकार अपने प्रयासों को केवल ऑटोमोबाइल निर्माण तक सीमित नहीं रख रही है और उन अन्य क्षेत्रों में भी संभावनायें तलाशेगी, जिनमें टाटा समूह कार्यरत है।
मंत्री ने कहा, "केवल ऑटोमोबाइल उद्योग ही नहीं, बल्कि टाटा समूह के पास उद्योग के कई अन्य क्षेत्र भी हैं। हम सभी संभावित रास्तों की तलाश करेंगे।"श्री रॉय ने केंद्र सरकार की 'भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य)' में भाग लेने की राज्य की योजनाओं की भी रूपरेखा पेश की। यह 33,660 करोड़ रुपये की योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकारों और निजी निवेशकों के बीच भागीदारी के माध्यम से औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास करना और निवेश को बढ़ावा देना है।
पिछली सरकार पर तंज कसते हुए श्री रॉय ने कहा कि बंगाल के पास इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी थी। उन्होंने कहा, "भव्य योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ बुनियादी ढांचागत शर्तें पूरी होनी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से, हमें पिछली सरकार से विरासत में कुछ नहीं मिला, न तो कोई लैंड बैंक था और न ही कोई निश्चित औद्योगिक नीति। हमारे पास डीपीआर तैयार करने में सक्षम कोई एजेंसी तक नहीं थी।"श्री रॉय ने कहा, "इसलिए हमें सब कुछ नये सिरे से बनाना होगा।" मंत्री ने बताया कि योजना के तहत राज्यों का प्रस्ताव जमा करने का मूल समय-सीमा जुलाई-अगस्त थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर सितंबर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार अगस्त तक केंद्र को औपचारिक रूप से पत्र लिखेगी।
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