सिलीगुड़ी , सितंबर 06 -- पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मानिकचक प्रखंड के अंतर्गत द्वीपीय क्षेत्र भूटनी दियारा में रविवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। गंगा का जलस्तर बढ़ने से 18 और गांव जलमग्न हो गये हैं, जिससे हजारों लोग बाढ़ में फंस गये हैं और क्षेत्र के बड़े हिस्से का संपर्क कट गया है।
मानिकचक घाट पर आज दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 25.52 मीटर दर्ज किया गया, जबकि अत्यधिक खतरे का स्तर 25.30 मीटर है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार नदी अत्यधिक खतरे के स्तर से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और जलस्तर में अभी भी वृद्धि जारी है। अधिकारियों ने अगले 48 घंटों में और इलाकों के जलमग्न होने की चेतावनी दी है।
मानिकचक प्रखंड प्रशासन के अनुसार, रविवार सुबह तक 38 गांवों में 7,450 से अधिक परिवार बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे। अब 18 और गांवों के जलमग्न होने के बाद प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 56 हो गयी है।
कटाव ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नदी किनारे कटाव के कारण अब तक करीब 380 परिवार विस्थापित हो चुके हैं और उनके मकान नदी में बह गए हैं। 11 से अधिक गांव कटाव से प्रभावित हैं, जबकि मानिकचक और गोपालपुर ग्राम पंचायतों पर भी नए सिरे से कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन ने 370 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और 12 नावों को सेवा में लगाया गया है। हालांकि, कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट जाने के कारण बाढ़ में फंसे अनेक परिवार अपनी जोखिम पर पहले से मौजूद तटबंधों और अन्य ऊंचे स्थानों पर चले गए हैं।
जिलाधिकारी राजनवीर सिंह कपूर, कानून मंत्री बिराज विश्वास, सिंचाई राज्य मंत्री जॉयल मुर्मू और मानिकचक विधायक गौर चंद्र मंडल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के कर्मचारी भी बचाव एवं राहत कार्यों में जुटे हैं।
कई इलाके अब भी पहुंच से बाहर हैं, जिससे राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गयी है। स्थानीय निवासी पार्थ झा ने कहा, "स्थिति बेहद गंभीर है। प्रशासन कई बाढ़ में फंसे लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। चिकित्सा सहायता नहीं है और कई इलाकों में राहत सामग्री भी नहीं पहुंची है।"बाढ़ पीड़ित शरत मंडल ने कहा कि ग्रामीणों को ऐसी स्थिति की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, "हमें बताया गया था कि इलाके में पानी नहीं आएगा और तटबंध की हर कीमत पर सुरक्षा की जाएगी। इसलिए हम ऐसी बाढ़ के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन तटबंध टूटने के बाद पिछले तीन दिनों से हम परेशान हैं। हमें नहीं पता कि यह परेशानी कब तक जारी रहेगी। हमारी खड़ी और काटकर रखी गई फसलें पानी में डूबी हैं। हमें नहीं पता कि उन्हें कैसे बचाएं। गायों और बकरियों को बचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।"वृद्ध निवासी पूर्णिमा मंडल के लिए संकट और भी पीड़ादायक हो गया है। उन्होंने कहा, "हमें केवल एक तिरपाल मिला है। सूखा भोजन नहीं पहुंचा है। हम बाढ़ के पानी के ऊपर बनाए गए एक ऊंचे चबूतरे पर रह रहे हैं। शौचालय पानी में डूब गए हैं। हमारी हालत बहुत खराब है। हमारे आसपास का पानी इतना दूषित है कि हमें पीने के लिए भी उसी पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ रहा है।"वाराणसी और पटना समेत ऊपरी इलाकों से नीचे की ओर आ रहे पानी से स्थिति और बिगड़ रही है। अधिकारियों ने बताया कि बढ़ती गंगा का पानी फुलहर नदी में भी पीछे की ओर जा रहा है। फुलहर का जलस्तर पहले ही 27.43 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे रतुआ के कुछ हिस्सों में आगे बाढ़ आने की आशंका बढ़ गयी है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कहा कि गंगा का जलस्तर कम से कम अगले 48 घंटों तक बढ़ने की संभावना है। मौजूदा स्थिति ने 1998 की विनाशकारी बाढ़ की यादें भी ताजा कर दी हैं। उस समय मानिकचक घाट पर गंगा का जलस्तर करीब 26.50 मीटर पहुंच गया था, जो जिले में अब तक दर्ज सबसे ऊंचा स्तर था।
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