सिलीगुड़ी , अक्टूबर 26 -- पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के राजाभातखावा में सोमवार को पर्यटन गतिविधियां बाधित हो गईं। ग्रामीणों ने 'वन अधिकार अधिनियम' लागू करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज करते हुए सुबह 11 बजे से पर्यटक सफारी टिकट काउंटर के सामने धरना शुरू कर दिया।

कई पर्यटक सफारी किए बिना ही लौट गए जबकि कुछ अन्य इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया जाएगा।

सोमवार को यह आंदोलन अपने 22वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारी पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने वन विभाग पर आरोप लगाया है कि विभाग ने पीडब्ल्यूडी सड़क पर बने एक चेकपोस्ट को टोल वसूली केंद्र में बदल दिया है। उन्होंने इस इलाके में प्रवेश करने वाले लोगों से वसूले जा रहे शुल्क पर सवाल उठाए हैं और 'वन अधिकार अधिनियम' के तहत अपने अधिकारों को मान्यता देने की मांग की है।

इस विवाद के व्यापक परिणाम हो सकते हैं जिसमें मुख्य वन क्षेत्र से निवासियों को कहीं और बसाने का प्रस्ताव भी शामिल है। पुनर्वास प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो चुका है लेकिन दूसरा चरण अभी बाकी है और कुछ निवासी इस व्यवस्था को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। बक्सा टाइगर रिज़र्व में एक बाघिन को छोड़े जाने के बाद लगाई गई पाबंदियों ने स्थानीय लोगों के असंतोष को और बढ़ा दिया है।

राज्य में एक लंबे समय से आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग, जिला प्रशासन और पर्यटन प्रतिनिधियों सहित अन्य संबंधित पक्षों को अपनी मांगें सौंप दी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, वन मंत्री मनोज कुमार उरांव और गृह एवं पर्वतीय मामलों के राज्य मंत्री बिशाल लामा से भी संपर्क किया है।

वन विभाग और राज्य सरकार ने अभी तक इस ताज़ा आंदोलन पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे लगाए गए। सूत्रों का आरोप है कि कम्युनिस्ट नेताओं का एक समूह वन विभाग, प्रशासन और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के ख़िलाफ़ इस आंदोलन को आयोजित करने और जारी रखने में मदद कर रहा है।

एक नवंबर को प्रस्तावित बैठक को गतिरोध दूर करने के एक संभावित अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि जब तक उन्हें अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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