सिलीगुड़ी , जून 18 -- उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री उदयन गुहा को गुरुवार को दिनहाटा उप-मंडलीय अदालत ने जबरन वसूली और धोखाधड़ी के एक मामले में सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। कूचबिहार पुलिस ने अदालत से पूर्व मंत्री की14 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सात दिन की हिरासत की मंजूरी दी।
श्री गुहा को बुधवार को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था और गुरुवार सुबह दिनहाटा लाया गया। दिनहाटा थाना पहुंचने पर जब पत्रकारों ने श्री गुहा से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया है और वह पूरा मामला जानने के बाद ही कुछ कहेंगे।
पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के बाद दिनहाटा शहर में भारी तनाव देखा गया। बुधवार को जहां उनकी गिरफ्तारी की खबर पर लोगों ने मिठाइयां बांटी थीं, वहीं गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में लोग थाने, अस्पताल और अदालत के बाहर जमा हो गए। इनमें वे लोग भी शामिल थे जिन्होंने पूर्व मंत्री के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक धमकी और जबरन वसूली का शिकार होने का दावा किया था।
जब पुलिस गुहा को अनिवार्य चिकित्सा जांच के लिए दिनहाटा उप-मंडलीय अस्पताल ले जाने लगी, तो उग्र भीड़ ने चोर-चोर के नारे लगाए और उनके वाहन पर सड़े हुए अंडे, सड़ी हुई सब्जियां, फल, जूते-चप्पल और कीचड़ फेंका। स्थिति की संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने बाहर निकालने से पहले पूर्व मंत्री को सुरक्षा हेलमेट पहनाया था।
अस्पताल से अदालत ले जाते समय भी प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मंत्री के वाहन को निशाना बनाया और कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की, जिससे वाहन का अगला शीशा और पूरी बॉडी कीचड़ और सड़ी सब्जियों से सन गयी। पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने कई सुरक्षा घेरे बनाकर भीड़ को बमुश्किल नियंत्रित किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला रूपम साहा नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया है, जिसमें श्री गुहा सहित 14 लोगों पर बड़े पैमाने पर जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। इस मामले में पूर्व मंत्री को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
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