ढाका , सितंबर 5 -- बंगलादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान आगामी आठ सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे। इसके साथ ही बंगलादेश को दूसरी बार महासभा का नेतृत्व करने का गौरव प्राप्त होगा। इस सत्र में उच्चस्तरीय आम विचार-विमर्श 22 सितंबर से प्रारंभ होगा, जिसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, सभा को संबोधित करेंगे।
श्री रहमान दो जून को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गुप्त मतदान के जरिए 81वें सत्र के अध्यक्ष चुने गए थे। इस चुनाव में उन्होंने साइप्रस के विदेश मंत्री के विशेष दूत एंड्रियास एस. काकोरीस को आठ मतों से पराजित किया था। वह वर्तमान अध्यक्ष एनालेना बेयरबोक का स्थान लेंगे।
भारत ने खलीलुर रहमान के चुनाव पर बंगलादेश को बधाई दी थी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जून में सोशल मीडिया पर एक संदेश में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने भी अपनी शुभकामनाएं दी थीं। इससे पहले अप्रैल में बंगलादेशी संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने कहा था कि भारत बंगलादेश का सबसे करीबी पड़ोसी है और रहमान के नामांकन के लिए नई दिल्ली का समर्थन एक सहयोगात्मक और उदार दृष्टिकोण को दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र की क्षेत्रीय चक्रानुक्रम प्रणाली के तहत इस बार महासभा अध्यक्ष के नामांकन की बारी एशिया-पैसिफिक समूह की थी। श्री रहमान का यह निर्वाचन बंगलादेशी कूटनीति के लिए एक ऐतिहासिक पल है, क्योंकि इससे पहले बंगलादेश को 1986 में 41वें सत्र के दौरान महासभा की अध्यक्षता मिली थी, जब पूर्व विदेश सचिव और राजनीतिज्ञ हुमायूं रशीद चौधरी अध्यक्ष बने थे। लगभग चार दशकों के बाद कोई बंगलादेशी राजनयिक विश्व के इस सबसे बड़े बहुपक्षीय मंच का नेतृत्व करने जा रहा है।
महासभा के अध्यक्ष के रूप में श्री रहमान 81वें सत्र के दौरान पूर्ण बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और उच्चस्तरीय बहस सहित असेंबली के तमाम कार्यों की निगरानी करेंगे। बंगलादेश के विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने शनिवार को बताया कि देश इस आगामी सत्र का उपयोग अपने विकास, आर्थिक क्षमता और जारी सुधारों को प्रदर्शित करने के लिए करने की योजना बना रहा है।
ढाका में एक परिचर्चा में सुश्री शमा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, महामारी की रोकथाम और परमाणु निरस्त्रीकरण के मुख्य एजेंडे में शामिल होंगे। यह सत्र 'विकास के अधिकार की घोषणा' और 'डरबन घोषणा' की 40वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक होगा।
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