चंडीगढ़ , जून 15 -- पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया है कि जनता का विश्वास खोने और लगातार चुनावी हार झेलने के बाद शिरोमणि अकाली दल तथा बादल परिवार ने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने के लिए सिखों की पूजनीय संस्थाओं को राजनीतिक लड़ाई का मैदान बना दिया है।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को निशाना बनाने के लिए जिस तथाकथित फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, वह वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान तक स्थापित नहीं कर पायी है। उन्होंने दावा किया कि यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए किया गया एक और असफल प्रयास साबित हुई है।
श्री पन्नू ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब दुनिया भर के सिखों की सर्वोच्च और सम्मानित संस्था है तथा इसे किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं समझा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि जत्थेदार की नियुक्ति अकाली नेतृत्व के प्रभाव में हुई थी और उनकी कार्यप्रणाली से संस्थाओं के राजनीतिकरण की आशंका पैदा होती है।
फोरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन है। उन्होंने पूछा कि यदि वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित नहीं माना जाये, तो संबंधित व्यक्ति की पहचान और अन्य तथ्यों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। आप नेता ने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी इस पूरे विवाद से जुड़े तथ्यों को जनता के सामने रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल के शासनकाल के दौरान हुई बेअदबी की घटनाओं, कोटकपूरा और बेहबल कलां मामलों में आज तक पंजाब को पूर्ण न्याय नहीं मिला है।
श्री पन्नू ने कहा कि वर्ष 2022 में पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को भारी जनादेश देकर सत्ता सौंपी थी और उसके बाद राज्य सरकार ने कई जनकल्याणकारी कदम उठाये हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने नहरों के पानी की पहुंच 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक पहुंचाई, किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई, परिवारों को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया तथा कानून-व्यवस्था और जनसेवाओं में सुधार के लिए कई पहल की हैं।
उन्होंने कहा कि मान सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया है, जिसे लेकर बादल परिवार असहज महसूस कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल अब अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देखकर धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों में घसीटने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब के लोग धार्मिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं और उन्हें राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देंगे।
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