बैतूल , अगस्त 17 -- मध्यप्रदेश में बैतूल से आशापुर-खंडवा प्रस्तावित फोरलेन सड़क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजे को लेकर किसानों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। सोमवार को बोदी जुनावानी क्षेत्र में किसानों ने बारिश के बीच महापंचायत आयोजित कर प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े पदाधिकारी और किसान नेता भी महापंचायत में शामिल हुए। किसानों ने प्रशासन से भूमि का वास्तविक मूल्यांकन कर उचित एवं बढ़ा हुआ मुआवजा देने की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि फोरलेन परियोजना के लिए बड़ी संख्या में किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। क्षेत्र आदिवासी बहुल होने के बावजूद लंबे समय से जमीनों की सरकारी दरों में अपेक्षित संशोधन नहीं हुआ है। किसानों के अनुसार वर्तमान में जमीन की सरकारी दर करीब छह लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि बाजार मूल्य इससे दो से तीन गुना अधिक है। ऐसे में केवल सरकारी दर के आधार पर मुआवजा तय करना किसानों के साथ न्याय नहीं होगा।
किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मुआवजा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में सरकारी दर का दोगुना मुआवजा दिए जाने की बात सामने आ रही है। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से चार गुना मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत कम राशि मिलने की जानकारी दी जा रही है। इसी को लेकर प्रभावित किसानों में नाराजगी बढ़ी है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि उनके लिए जमीन महज संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। कृषि भूमि चले जाने के बाद मिलने वाली राशि से खेती, रोजगार और परिवार की आर्थिक सुरक्षा की भरपाई आसान नहीं होगी। इसलिए मुआवजा निर्धारित करते समय बाजार मूल्य, भूमि की उपयोगिता और किसानों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उनका आरोप है कि ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासन की ओर से मौके पर पहुंचकर प्रभावित किसानों से विस्तृत चर्चा नहीं की गई। किसानों ने कहा कि उनकी आपत्तियों और समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
महापंचायत में किसानों ने कहा कि वे विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने भूमि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र के किसान एकजुट होकर चक्काजाम करेंगे और बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बारिश के बावजूद महापंचायत में किसानों की मौजूदगी ने उनके असंतोष को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया।
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