लखनऊ , फरवरी 16 -- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि डेटा में साफ दिख रहा है कि पीडीए के वोटों की टार्गेटेड डकैती हो रही है। फॉर्म-7 के जरिए सुनियोजित तरीके से लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी हस्ताक्षर कर बड़ी संख्या में मतदाताओं, खासकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम काटे गए हैं।

सोमवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि कई मामलों में अज्ञात व्यक्तियों के नाम से आवेदन देकर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि गोविंद राय के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 16 मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए फॉर्म-7 भरकर करीब 100 वोट काट दिए गए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भुरीपुरा विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी से जुड़े अतीक अहमद का भी वोट इसी प्रक्रिया के तहत कटवा दिया गया। उन्होंने कहा कि एक गांव में सपा विधायक की पत्नी समेत 146 लोगों के नाम हटाने की साजिश रची गई। अखिलेश यादव ने कहा कि एक मामले में इस वजह से नाम काटा गया क्योंकि उसके 6 बच्चे थे। उनसे पूछा गया कि 6 बच्चे क्यों हैं।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा की एक गुप्त बैठक में यह तय किया गया था कि जहां-जहां समाजवादी पार्टी मजबूत है या जीत चुकी है, वहां मतदाताओं के नाम कटवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पीडीए वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है और आंकड़ों के अनुसार 76 प्रतिशत नोटिस इसी वर्ग के लोगों को मिले हैं, जिनमें बड़ी संख्या यादव और मुस्लिम मतदाताओं की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग गांव-गांव में जाकर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि 'गद्दी विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं। वे यह भी कहते हैं कि हम चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। इस मुद्दे पर अगली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। सपा मुखिया ने कहा, " हमने पहले ही कहा था कि सैकड़ों की संख्या में भारतीय जनता पार्टी के लोग पीडीए के वोट कटवा रहे हैं। भाजपा के लोग अब भी नहीं मान रहे और फॉर्म-7 के जरिए वोट कटवाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब बातें सामने आईं तो निर्वाचन आयोग को अपनी कमी छुपाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब सरोजिनी नगर के वोटों को लेकर सवाल पूछे गए तो चुनाव आयोग के हाव-भाव बदल गए और वे जवाब नहीं दे पाए।

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