तारकेश्वर , जून 20 -- पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के आने के बाद पहले आधिकारिक 'पश्चिम बंगाल दिवस' के अवसर पर शनिवार को तारकेश्वर एक उत्सव के माहौल में डूब गया। यह मंदिर शहर बंगाल की विरासत, संस्कृति और इतिहास का जश्न मनाने वाले एक भव्य मंच में बदल गया।
कोलकाता से लगभग 60 किलोमीटर दूर हुगली जिले के इस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह बंगाल की पहचान को दर्शाने वाले एक बेहद सजे-धजे सांस्कृतिक प्रदर्शन के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम की शुरुआत में बालीगारी मैदान वंदे मातरम की गूंज से सराबोर हो गया। इसने पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। इसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया गया। मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस वर्ष इस गीत का चयन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह प्रसिद्ध बंगाली उपन्यासकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 150 साल पहले इसकी रचना की थी।
इसके बाद समारोह बंगाल में सांस्कृतिक परंपराओं के जीवंत प्रदर्शन हुआ। रवींद्र संगीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कूचबिहार के कोच राजवंश और राजबंशी समुदाय से जुड़े एक पारंपरिक नृत्य रूप 'अतिथि स्मरण बैरागी नृत्य' ने मंच पर उत्तर बंगाल की समृद्ध विरासत की झलक पेश की। इसके बाद बाउल गायकों ने अपनी प्रस्तुति दी और पूरे माहौल को बंगाल की सदाबहार लोक धुनों से भर दिया। प्रसिद्ध छऊ नृत्य के साथ यह सांस्कृतिक खंड एक और ऊंचे मुकाम पर पहुंच गया। इस नाटिका में नृत्य और रंग-बिरंगे मुखौटों के माध्यम से महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय को दर्शाया गया था।
पारंपरिक उपहारों के आदान-प्रदान ने इस कार्यक्रम में पूरी तरह से बंगाली रंग भर दिया। मुख्यमंत्री अधिकारी ने प्रधानमंत्री मोदी को बाबा तारकनाथ की एक फ्रेम की गई तस्वीर और देवी दुर्गा की डोकरा कला से बनी एक मूर्ति भेंट की। इसके साथ ही मोदी को बंगाल की दो प्रसिद्ध मिठाइयां - रसगुल्ला और जोलभोरा संदेश भी भेंट की गईं।
समारोह स्थल को भी बंगाल के दृश्यों से बहुत सुंदर सजाया गया था। आयोजकों ने मैदान को राज्य से जुड़े प्रतीकों से सजाया। कोलकाता की पीली टैक्सियों, हाथ से खींचने वाले रिक्शों, दक्षिणेश्वर मंदिर और बेलूर मठ की तस्वीरों को कार्यक्रम स्थल पर लगाया गया। विशेष रूप से की गई फूलों की सजावट यहाँ के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक थी। इसके लिए एंथुरियम के फूल थाईलैंड से मंगाए गए थे, जबकि जरबेरा और लिली के फूल तमिलनाडु के ऊटी से आए थे। पांच किस्मों के गुलाब, नीली डेज़ी, रजनीगंधा और गेंदे के फूलों ने मंच की रंगत बढ़ा दी। इन्हें तामलुक के कारीगरों ने पिछले कुछ दिनों की कड़ी मेहनत से सजाया था।
कार्यक्रम स्थल के दोनों ओर पांच बड़े शेड बनाए गए , जबकि प्रधानमंत्री के आगमन के लिए बालीगारी मैदान के पास ही एक हेलीपैड तैयार किया गया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। इसमें मेटल डिटेक्टर से जांच और पुलिस तथा सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती शामिल थी।
शुक्रवार सुबह हुई बारिश के कारण क्षेत्र के कुछ हिस्सों में जलजमाव हो गया था, जिससे तैयारियों के सामने थोड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। हालांकि, प्रशासनिक टीमों ने प्रधानमंत्री के आगमन से पहले कार्यक्रम स्थल को दुरुस्त करने के लिए चौबीसों घंटे काम किया।
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