इटावा , फरवरी 16 -- इटावा के फिशर वन क्षेत्र में स्थित कथित अवैध मजार की बेदखली के प्रकरण में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ने मजार पक्ष को 20 फरवरी तक भूमि संबंधी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग के बढ़पुरा रेंज अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने सोमवार को बताया कि डीएफओ विकास नायक की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मजार के केयरटेकर फजले इलाही को 20 फरवरी तक संबंधित लीगल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।
बताया गया कि फजले इलाही बीमारी के कारण पेशी पर उपस्थित नहीं हो सके। उनके अधिवक्ता नदीम ने एक निजी चिकित्सक का मेडिकल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान नोटिसकर्ताओं की ओर से मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए। अब 20 फरवरी को दस्तावेजों की प्रस्तुति के बाद डीएफओ प्रकरण में आगे का निर्णय लेंगे।
वन विभाग के अनुसार 23 जनवरी को फिशर वन क्षेत्र में स्थित उक्त मजार को ध्वस्त करने संबंधी नोटिस जारी किया गया था। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त शिकायत के क्रम में की जा रही है। राजस्व विभाग एवं अल्पसंख्यक विभाग द्वारा भी वन विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी गई है।
सुनवाई के दौरान मजार पक्ष की ओर से भूमि संबंधी कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, हालांकि कुछ दस्तावेज ऐतिहासिकता के समर्थन में उपलब्ध कराए गए हैं। मजार पक्ष के अधिवक्ता ने गूगल मैप से प्राप्त एक नक्शा भी अदालत में प्रस्तुत किया।
मजार प्रबंधन से जुड़े मुस्तकीम ने कहा कि इबादत पर रोक से समुदाय में निराशा है और शीघ्र ही इबादत की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाल में शबे-बरात के अवसर पर प्रस्तावित उर्स कार्यक्रम को वन विभाग ने निरस्त कर दिया था तथा मार्ग पर अवरोध लगा दिए गए थे। वन विभाग ने पुष्टि की है कि संबंधित स्थल वन क्षेत्र में स्थित है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
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