अमृतसर , जुलाई 10 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और मानवाधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर आधारित फिल्म 'सतलुज' पर लगाये गये प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को अमृतसर में रोष मार्च निकाला।

श्री दरबार साहिब के घंटाघर प्लाजा से उपायुक्त कार्यालय तक निकाले गये मार्च के बाद पंजाब के राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त उपायुक्त पल्लवी मिश्रा को सौंपा गया।

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने 1980 और 1990 के दशक में कथित तौर पर लापता हुए लोगों और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों को उजागर करने का कार्य किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और उस दौर की घटनाओं को दर्शाने वाली फिल्म 'सतलुज' पर रिलीज के कुछ समय बाद प्रतिबंध लगाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म पर रोक लगाकर इतिहास या सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।

श्री धामी ने यह भी आरोप लगाया कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा मामले में सजा काट रहे एक पुलिस अधिकारी के प्रति सरकार का नरम रवैया अपनाया जा रहा है, जबकि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों के मामलों पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिए जा रहे। उन्होंने बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह हवारा और अन्य बंदी सिखों का उल्लेख करते हुए उनके मामलों पर भी संवेदनशीलता से विचार किये जाने की मांग की।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल हटाकर इसे दोबारा रिलीज किया जाना चाहिए, ताकि नयी पीढ़ी पंजाब के इतिहास और उस दौर की घटनाओं से परिचित हो सके। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के आह्वान के अनुसार 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे आयोजित शहीद स्मृति अरदास में बड़ी संख्या में संगत से शामिल होने की भी अपील की।

रोष मार्च में एसजीपीसी के पदाधिकारी, सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर फिल्म से प्रतिबंध हटाने तथा सिखों के साथ हुई कथित ज्यादतियों के मामलों में न्याय की मांग की।

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